
बेंगलूरु। रिटेल सेक्टर में विदेशी निवेश, पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि और गैस सिलेंडरों पर सब्सिडी के मामले पर देश भर में फैली विरोध की आग को ठंडा करने के लिये प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने टीवी पर लाइव टेलीकास्ट देकर देश को संबोधित किया। प्रधानमंत्री ने कई महत्वपूर्ण बातों से जनता को अवगत कराया, जिसकी टीवी चैनलों समेत कई लोगों ने कहा कि पीएम का यह कदम सराहनीय है। हम पूछते हैं कि प्रधानमंत्री हर हफ्ते जनता को क्यों संबोधित नहीं करते हैं।
इस पर यदि सरकार यह कहे कि पीएम साहब के पास टाईम नहीं है, तो गलत होगा, क्योंकि अगर एक विकसित देश अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा के पास हर हफ्ते देश के लिये समय है, तो मनमोहन सिंह के पास क्यों नहीं। हम आपको बता दें कि अमेरिका के राष्ट्रपति हर सप्ताह रेडियो पर सीधे व्हाइट हाउस से जनता को संबोधित करते हैं। यह चलन आज से नहीं बल्कि वर्षों से चला आ रहा है।
वहीं बात अगर मनमोहन सिंह की करें, तो पिछली बार उन्होंने 26/11 हमले के वक्त जनता को संबोधित किया था। हम यहां 15 अगस्त को होने वाले राष्ट्र के नाम संदेश को शामिल नहीं कर रहे हैं।
इस बारे में वनइंडिया ने राष्ट्रीय अधिकार संगठन के अध्यक्ष डा. आलोक चांटिया से बात की, तो उन्होंने कहा कि अगर सरकार यह कहे कि रेडियो अब कोई सुनता नहीं, तो हम आपको बता दें, कि तमाम एफएम चैनल इस समय घर-घर में सुने जा रहे हैं। इंटरनेट रेडियो, पॉडकास्ट, इंटरनेट पर वीडियो, आदि की सुविधा का इस्तेमाल लोग आसानी से कर सकते हैं। यहां तक ये वीडियो सीधे लोगों के मोबाइल फोन पर खुलेंगे और लोग खुद को सरकार से जुड़ा महसूस करेंगे।
इतिहास की बात करें तो अमेरिका में यह चलन शुरू किया था फ्रेंकलिन डी रूसवेल्ट ने। तब वो न्यूयॉर्क के गवर्नर थे। बाद में वो राष्ट्रपति बने। राष्ट्रपति के तौर पर साप्ताहिक संबोधन की शुरुआत भी उन्होंने ही की। उनके बाद कुछ समय के लिये यह बंद हो गया, जिसे रोनाल्ड रीगन ने 1982 में फिर शुरू किया। इसे आगे बढ़ाते हुए जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने ऑडियो पॉडकास्ट शुरू किया और अब इसका इस्तेमाल बराक ओबामा बाखूबी कर रहे हैं।


















