
नयी दिल्ली (ब्यूरो)। डीजल की कीमतों में बढ़ोत्तरी के बाद एक बार फिर आम जनता पर महंगाई के मार पड़ने वाली है। इस बार चीनी जहर की तरह लोगों के गले मे उतरने वाली है। सूत्रों के हवालों से खबर आ रही है कि यूपीए सरकार सरकारी राशन की दुकानों के जरिये मिलने वाली चीनी के दाम में पांच रुपये की बढ़ोत्तरी कर सकती है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों से जुड़ी कैबिनेट कमेटी की अगले सप्ताह होने वाले बैठक में इस पर फैसला लिया जा सकता है। फूड डिपार्टमेंट की तरफ से भेजे गये प्रस्ताव में कहा गया है कि सरकार पर बढ़ते सब्सिडी के बोझ को ध्यान में रखते हुए ऐसा करना मजबूरी भी है और जरुरी भी।
मालूम हो कि मौजूदा समय में सरकारी राशन की दुकानों पर चीनी की कीमत 13.50 रुपये प्रति किलो है। यह कीमत 1 मार्च 2002 को निर्धारित की गई थी। इस दुकानों पर गरीबी रेखा के नीचे वालों को ही चीनी मिलती है। प्रस्ताव के मुताबिक सरकार चाहती है कि अब चीनी की कीमत 19 रुपये प्रतिकिलो कर दिया जाये। दरअसल सरकार हर साल देश की चीनी मिलों के कुल उत्पादन का 10 फीसदी हिस्सा सस्ती दरों पर खरीदती है जिसे लेवी शुगर कहा जाता है। इसी चीनी को सरकारी राशन की दुकानों के जरिए बीपीएल परिवारों को बेचा जाता है। हर साल ऐसी करीब 25 से 26 लाख टन चीनी खरीदी जाती है।
इस संबंध में अब सरकार का कहना है कि वह 19.35 रुपये प्रति किलो के हिसाब से लेवी शुगर खरीदती है जिसे ग्राहकों तक पहुंचाने में 25.37 रुपये का खर्च आता है। वहीं जानकारों की मानें तो इसके पीछे की कहानी कुछ दूसरी है। दरअसल चीनी मिलें सरकार से यह मांग करती आईं हैं कि लेवी सुगर के दामों में इजाफा किया जाये। ऐसे में जाहिर है कि सरकार के पीछे चीनी मिलों का दबाव भी काम कर रहा है।


















