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अलग-थलग पड़ी कांग्रेस, अल्‍पमत में यूपीए

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Published: Thursday, September 20, 2012, 17:40 [IST]

 Congress In Isolation Upa In Minority

मंगलवार की शाम यूपीए और तृणमूल कांग्रेस की आराम और साधन की शादी टूट गई, जब पश्चिम बंगाल ममता बनर्जी ने कांग्रेस से अलग होने का फैसला सुनाया। "हम लोग उसके साथ नहीं रहेगा", कोलकाता में बैठक के दौरान ममता ने कहा।

रेल मंत्री मुकुल रॉय मेत छह लोग शुक्रवार को अपने इस्‍तीफे प्रधानमंत्री को सौंपेंगे, जिसके लिये उन लोगों ने प्रधानमंत्री से समय भी ले लिया है। इसी के साथ तृणमूल कांग्रेस यूपीए से बाहर हो जायेगी। ममता बाहर से समर्थन जारी रखेंगी या नहीं, यह तो शुक्रवार को ही पता चलेगा, लेकिन अभी जो साफ है वो यह कि सरकार मुश्किल में तो पड़ ही गई है।

ममता के इस फैसले पर तमाम बुद्धिजीवियों ने अपने कमेंट दिये हैं। एक कांग्रेस नेता ने कहा कि ममता बनर्जी की धमकी देने की आदत पड़ गई है और वो पिछले तीन साल से ऐसा करती आ रही हैं, इसमें नया क्‍या है। इस बार भी वो फिर से कंप्रोमाइस कर लेंगी और सब सामान्‍य हो जायेगा। एक नेता ने प्रधानमंत्री की तारीफ करते हुए कहा कि उन्‍होंने ममता बनर्जी के सामने कोई ऑफर नहीं रखकर बहुत अच्‍छा काम किया है।

ममता बनर्जी ने कहा कि वो जनता विरोधी नीतियों का समर्थन कभी नहीं करेंगी। इसके लिये उन्‍हें चाहे कुछ भी क्‍यों न करना पड़े। उन्‍होंने अपनी शर्तों को दखते हुए कहा कि एफडीआई का मुद्दा कोलगेट को दबाने के लिये उछाला गया है। लोग यह पूछ रहे हैं और हमारा भी यही सवाल है। ममता ने पूछा अभी तक काला धन वापस क्‍यों नहीं लाया गया। उनकी इस बात से लोगों को लगने लगा है कि जल्‍द ही भ्रष्‍टाचार विरोधी आंदोलनों का हिस्‍सा तृणमूल कांग्रेस भी बनेगी।

ममता ने तीसरी बात में कांग्रेस पर ब्‍लैकमेलिंग की राजनीति करने का अरोप लगाया। उन्‍होंने कहा, "मैं जानती हूं कि कांग्रेस को अगर मुझसे कोई समस्‍या होगी, तो वो मायावती के पास जायेगी, अगर उनसे भी समस्‍या हुई तो मुलायम सिंह यादव के पास। अगर डीएमके से समस्‍या हुई तो एडीएमके से मिलेगी... लेकिन अब खेल खत्‍म हो चुका है।"

ममता बनर्जी के 19 सांसदों के पीछे हटने के बाद कांग्रेस का गठबंधन जरूरत भर के आंकड़ों को नहीं छू पायेगा। या तो वो बसपा से या सपा से अंदर के समर्थन की अपील करेगी।

सच पूछिए तो ममता बनर्जी के इस कदम का सीधा असर चुनाव की ओर जाता दिखाई दे रहा है। यदि बसपा और सपा दोनों ने हाथ खींच लिया तो चुनाव निश्चित तौर पर हो सकते हैं। वहीं डीएमके ने भी आज भारत बंद का खुलकर समर्थन किया, यानी संप्रग में मात्र कांग्रेस और एनसीपी ही बचे हैं, जो इस कंपनी को आगे चलाना चाहेंगे और ऐसा कर पाना काफी मुश्किल होगा।

शुक्रवार को जो कुछ भी होगा वो पूरा देश देखेगा, लेकिन सवाल अभी से उठकर खड़ा हो चुका है, क्‍या देश में मध्‍यावधि चुनाव होंगे? क्‍या आने वाले दिनों में पार्टियों का जोड़-तोड़ होगा? अगले 72 घंटों में स्थिति पूरी तरह साफ हो जायेगी।

Inputs from Niticentral

English summary
Before the Trinamool Congress Ministers actually put in their papers and the party formally withdraws support to the Congress. There are several questions running in people's mind.
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