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भारत बंद, राजनीति और मैंगो मैन

Written by: अंकुर शर्मा
Updated: Thursday, September 20, 2012, 17:51 [IST]

 Bharat Bandh Politics And Common Man

बैंगलोर। एफडीआई, डीजल की कीमत में बढ़ोत्‍तरी और एलपीजी सिलिंडरों को सीमित करने के खिलाफ आज पूरे भारत में विपक्ष ने बंद का ऐलान किया है। पूरे देश में इस समय सड़कों पर राजनीतिक पार्टियों का आक्रोश देखने को मिल रहा है। जगह-जगह लोग ट्रेनों को रोक रहे हैं, धरना प्रदर्शन कर रहे हैं और सरकार विरोधी नारे लगा रहे हैं। राजनैतिक पार्टियां यह साबित करने में लगी हैं कि वो आम जनता के साथ हैं और उनका भला चाहती हैं। इसलिए वो सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रही हैं। विदेशी निवेश का विरोध करके वो व्यपारियों की शुभचिंतक बनने की कोशिश में है।

लेकिन जरा सोचिए, इन सबके पीछे देश का वो आम आदमी यानी कि मैगो मैन कहां है, जिसके लिए यह सब हो रहा है? क्या आम आदमी के लिए बुलाया गया बंद आम आदमी के भले के लिए है, यह सवाल इसलिए क्योंकि राजनीतिक पार्टियां उन चीजों पर हमला कर रही है जिनसे केवल आम आदमी परेशान होता है कोई सरकारी इंसान नहीं। सड़कों पर हो रहे प्रदर्शन के कारण ऑटो वालों की रोजी, सब्जी और ठेले वालों की रोटी छीन रही है। ट्रेनों के रोके जाने से  बीमार लोग अपने घर वक्त पर नहीं पहुंच पा रहे हैं। दुकाने बंद होने पर किसी बीमार बच्चे को दवा नहीं मिल पा रही है।

फेसबुक वॉल के पोस्‍ट ने उठाये सवाल

वनइंडिया के सबएडिटर बिलाल जाफरी ने अपनी फेसबुक वॉल पर लिखा है कि 'बेचारा भारत 4 महीने के बाद (31 मई) दोबारा आज फिर बंद हुआ। बंद का असर .... 6 वाली सिगरेट 8 में, 5 की चाय 8 में, 5 वाले पारले जी बिस्किट का खुला रेट 7 रुपये, दूध का पैकेट 2 रूपये महंगा अगर आप गलती से दुकानदार से जवाब तलब करें तो आपको शायद यही जवाब मिले अरे साहब... आज भारत बंद है इतना रिस्क लेके दूकान खोली है अब इतना मुनाफा तो बनता है। तो मित्रों आज भारत बंद है, आज का दिन पूरी तरह एन्जॉय करिए, घर में पड़ी कोई पुरानी डीवीडी देखिये। वैसे भी हम "आम आदमी" हैं हम इस बंद को त्योहार या छुट्टी के रूप में ही मना सकते हैं । सरकारी नौकरशाहों को सरकार सैलरी देगी, प्राइवेट कंपनियों में काम करने वालों को कॉम्‍प ऑफ मिल जायगा, हाँ मगर उनका वीकेंड ज़रूर बर्बाद हो सकता है । खैर इन बातों से परे हटकर आज का दिन परिवार के नाम करते हुए आप लोग उन्हें अपना पूरा टाइम ज़रूर दें । ये ऑफर तब तक है जब तक यूपीए केंद्र में और एनडीए विपक्ष में है। एन्जॉय'।

इसी संदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए वनइंडिया के ही चीफ सबएडिटर अजय मोहन ने लिखा है कि उनसे पूछिये जिनकी मां और बहन समय पर बंद के कारण घर नहीं पहुंच पाती हैं। 31 मई को भी भारत बंद था और उसी दिन उनकी पत्नी, बेटी और सहयोगी लखनऊ से बैंगलोर आयी थीं वो भी अकेली और स्टेशन से घर तक पहुंचने में केवल भगवान का सहारा था क्योंकि बंद के कारण दिलों में दहशत और रास्ते सूनसान थे। बसें फूंकी जा रही थीं।

इसी पोस्‍ट पर शशिकांत मौर्या ने लिखा कि उन दिहाड़ी मजदूरों के बारे में सोचिये जो रोज कुआँ खोद कर पानी पिते हैं। वो लोग एक वक्त की रोटी का जुगाड़ नहीं कर पाते। जरा सोचिये वो अपने परिवार का पेट कैसे भरेंगे बंद के दौरान। उनके बच्चे अपने नेताओं की ओर किस निगाहों से देखे रहे होंगे।

यह दर्द है उन लोगों का जो इस चोट से गुजरे है, यह बात उन लोगों की है जो देश और दुनिया के हालातों को बखूबी समझते हैं जिन्हें समाज बुद्दिजीवी वर्ग कहता है। यानी की अगर कोई चाय बेचने वाला यह बात कहता तो हो सकता है कि लोग कहते उसकी दुनिया केवल पेट भरने तक ही सीमित है लेकिन यह बातें वो कह रहे हैं जिनके पास कलम और दिमाग दोनों है और कोई संदेह नहीं कि उन्होंने सच बयां किया है।

लोग नहीं निकाल पा रहे हैं अपनी भड़ास

वहीं बिलाल जाफरी ने लिखा, "न जाने कितनी यादें हैं न जाने कितनी बातें, आज हर आदमी भरे बैठा हुआ है, लेकिन अपनी भड़ास नहीं निकाल पा रहा है। यही वजह है कि आम आदमी को अन्‍ना और केजरीवाल की जरूरत पड़ती है।"

आशुतोष बाजपेयी ने लिखा, "भाई ये सब राजनीति है इससे होना कुछ नही. ये नेता लोग अपना उल्लू सीधा करने में लगे है और हम बेवकूफ लोग इस बंद का समर्थन करके अपनी बर्बादी और अपनों का नुकसान कर रहे है।"

ऑल इंडिया आर्टिस्‍ट नासिरखान पठान लिखते हैं, "अंग्रेजो का शाशन अच्छा था। आज जो देश का हाल इस नेताओं ने किया है। सारे नेता चोर हैं। कोई दूध का धुला नहीं है।

तो यह होता है बंद का असर। आज समूचा विपक्ष एक होकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहा है लेकिन इस बंद से सरकार की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ने वाला है। उसके सिपाही तो आराम से अपने घरों में मजा ले रहे हैं। दूसरी तरफ सरकार के खिलाफ जाने वाली पार्टियों की नीयत भी साफ नहीं है सब अपना-अपना मतलब साध रहे हैं। भाजपा सत्ताहासिल करने के लिए आम जनता से जुड़ने की कोशिश कर रही है तो वहीं डीएमके, लेफ्ट और सपा अपना-अपना स्वार्थ पूरा ना होने के कारण सरकार के खिलाफ चिल्ला रहे हैं।

हालातों की जो तस्वीर हमारे सामने है उससे तो यही लगता है कि यह बंद आम इंसान के भले के लिए नहीं बल्कि आम आदमी को तंग करने के लिए है. जिसमें नफे की तो बात ही नहीं है सिर्फ और सिर्फ नुकसान है। कितनी अजब बात है कि महंगाई से भी आम आदमी ही मर रहा है और महंगाई को रोकने के लिए हो रहे उपायों से भी वही मरने को मजबूर है।

क्या आप इस बात से सहमत हैं, अपनी बात नीचे लिखे कमेंट बॉक्स में दर्ज करायें।

Story first published:  Thursday, September 20, 2012, 17:13 [IST]
English summary
The BJP led National Democratic Alliance along with other opposition parties have called a nationwide bandh today to protest against the UPA government. But the people say this is only a political agenda not a solution of common man problems.
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