
नई दिल्ली। एचआईवी पीडि़त एक शख्स ने अपनी सौतेली बेटी को हवस का शिकार बनाया था। रोहिणी कोर्ट ने इस शख्स को जानबूझकर एचआईवी संक्रमित करने और बलात्कर के जुर्म में 25 साल की सजा सुनाई है। देश का यह ऐसा पहला मामला है जब एड्स फैलाने के लिए किसी को इतनी सख्त सजा सुनाई गई है। कोर्ट ने पीडि़त के पुनर्वास के लिए 2 लाख रूपये आर्थिक मदद की भी बात कही है।
कोर्ट ने सजा सुनाते हुए कहा कि जानबूझकर इस शख्स ने अपनी सैतेली बेटी से न केवल बलात्कार किया बल्कि उसे पूरी जिंदगी मौत से जूझने पर मजबूर कर दिया। इसने उसको एचआईवी संक्रमित कर उसकी जान के लिए खतरा पैदा कर दिया है। जब लड़की ने इस मामले की शिकायत पुलिस से की, तब उसने जबरन उसको दवा खिलाकर उसका गर्भपात भी करा दिया।
कोर्ट ने दिल्ली सरकार से कहा है कि पीडि़त को 2 लाख रूपए का मुआवजा दिया जाए। इसके साथ की कोर्ट ने आदेश दिया है कि ऐसे नियम बनाए जाएं जिससे आरोपी के स्वास्थ्य की भी जांच हो। इससे पीडि़त को हुई स्वास्थ्य संबंधी हानि का पता चल जाएगा। आपको बता दे कि 42 वर्षीय शख्स 15 वर्षीय सौतेली बेटी का लंबे समय से बलात्कार कर रहा था। इस दौरान उसने लड़की का गर्भताप भी कराया।
कोर्ट ने दोषी को दुष्कर्म के लिए 10 साल की सजा, हत्या का प्रयास करने के लिए 10 साल की सजा और गर्भपात कराने के लिए 5 साल की सजा सुनाई है। कोर्ट ने कहा कि तीनों सजाएं अलग-अलग चलेंगी।


















