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भारत में नौकरियों के बाजार में मंदी

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Published: Tuesday, September 11, 2012, 16:33 [IST]

 Indian Job Market On Slow Pace

नई दिल्‍ली (ब्‍यूरो)। अगर आप कहीं नौकरी कर रहे हैं, तो मन लगाकर करिये, बार-बार गलतियां करके अपनी नौकरी को खतरे में न डालें और अगर आपका कहीं इंटरव्‍यू है, जो उसके लिये कड़ी मेहनत करिये, क्‍योंकि भारतीय बाजार में नौकरियों का संकट एक बार फिर गहराने लगा है। भारतीय कंपनियों में रिक्रूटमेंट की गति भी धीमी पड़ी है। यह गति अक्‍टूबर से दिसंबर तक और धीमी पड़ जायेगी।

यह बात हम नहीं बल्कि विश्‍वस्‍तर पर किया गया सर्वेक्षण कह रहा है। मैनपावर इंप्‍लॉयमेंट द्वारा किये गये सर्वेक्षण के अनुसार भारत के सिर्फ 27 फीसदी कंपनियां ही हैं, जो पिछले दो साल से सकारात्‍मक ऊर्जा के साथ भर्ती कर रही हैं। सिर्फ इन्‍हीं कंपनियों को अपने वर्तमान स्‍टाफ पर भरोसा भी है। यानी बाकी की 73 फीसदी कंपनियां ऐसी हैं, जिन्‍हें अपने वर्तमान स्‍टाफ पर 100 फीसदी भरोसा नहीं है। वैश्विक बाजार में डगमग स्थिति को देखते हुये ऐसी कंपनियां नई भर्ती करने से कतरा रही हैं।

अमेरिका और चीन सहित कई देशों में आर्थिक संकट की स्थिति पैदा होने की आशंका व्‍यक्‍त की जा रही है। ऐसे में इस सर्वेक्षण में पाया गया कि भारत की कई कंपनियां बाजार में मुनाफे के संकेत नहीं देखकर डर सी गई हैं। इसीलिये अब नया रिक्रूटमेंट करने में डर लग रहा है। कंपनियों को डर है कि कहीं नये लोगों पर इंवेस्‍टमेंट घाटे का सौदा न बन जाये। हालांकि रियल इस्‍टेट, रिटेल और मैनुफैक्‍चरिंग के क्षेत्रों में रिक्रूटमेंट की गति बढ़ने के आसार हैं। इनके अलावा अन्‍य क्षेत्रों में संकट बढ़ सकता है।

इस सर्वेक्षण पर नई दिल्‍ली के करियर काउंसिलर विवेक शाह का कहना है कि अगर भारत में रिक्रूटमेंट की गति धीमी हुई है, तो यह भारत के लिये खतरे की घंटी है, क्‍योंकि यहां हर साल लाखों की संख्‍या में ग्रेजुएट हर साल निकलते हैं। नये-नये कोर्सेस के साथ पोस्‍ट ग्रेजुएट्स की संख्‍या लगातार बढ़ रही है। यानी आने वाले दो-तीन वर्षों में नौकरी का गहरा संकट पैदा हो सकता है।

English summary
Job crisis is again hitting India as Indian employers are set to slow the pace of hiring in the October-December quarters.
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