
नयी दिल्ली (ब्यूरो)। राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने आज कहा कि कोयला ब्लाकों के आवंटन से हुए नुकसान के लिये प्रधानमंत्री सीधे तौर पर जिम्मेदार है इसलिये उन्हें पहले अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए। संसद में कथित कोयला घोटाले को लेकर लगातार दूसरे दिन हुये हंगामे और दोनो सदनों की कार्यवाही ठप्प रहने के बाद जेटली ने संवाददाताओं से कहा कि कोयला ब्लाक के आवंटन के कारण हुये नुकसान के लिये प्रधानमंत्री खुद दोषी हैं क्योंकि इस दौरान पांच वर्ष तक यह मंत्रालय उनके पास था। यह ध्यान दिलाने पर कि कुछ भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भी कोयला ब्लाकों की नीलामी का विरोध किया था।
जेटली ने कहा कि कोयला देश का प्रमुख खनिज है और यह सीधे राष्ट्रहित से जुडा है। अगर वर्ष 2005 में कुछ मुख्यमंत्रियों ने नीलामी का विरोध किया भी था तो प्रधानमंत्री को उसे खारिज करने में सात साल क्यों लग गये। सरकार द्वारा इस मुद्दे पर चर्चा के लिये राजी होने के बारे ध्यान दिलाने पर उन्होंने कहा कि 2-जी स्पेक्ट्रम आवंटन मामले में भी प्रधानमंत्री अप्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदार थे लेकिन कोयला ब्लाक घोटाले में तो प्रधानमंत्री सीधे तौर जिम्मेदार है। प्रधानमंत्री पहले इस्तीफा दे फिर चर्चा हो सकती है।
विपक्ष के हंगामे के कारण संसद के दोनों सदनों में प्रश्नकाल नहीं चल सका। लोकसभा की कार्यवाही 11 बजे शुरू होते ही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी गई। राज्यसभा की कार्यवाही भी दोपहर 12 बजे तक दो बार स्थगित हुई। दोपहर कार्यवाही शुरू होने के बाद भी यही स्थिति रही। प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग करते हुए भाजपा के सदस्य अध्यक्ष के आसन के समक्ष पहुंच गए। हंगामे को देखते हुए दोनों सदनों की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी। उसके बाद भी दोनों सदनों को कल तक के लिये स्थगित कर दिया गया।


















