
नई दिल्ली। सरकार सोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर के खिलाफ कड़े कदम उठा सकती है। पिछले दिनों भारत के कर्नाटक राज्य में पूर्वोत्तर वासियों पर हमले की अफवाहें फैलने से देश में अराजकता का माहौल फैल गया था। हमले के डर से कर्नाटक में रहने वाले हजारों पूर्वोत्तर वासी अपने गृहराज्य वापस लौटने लगे थे। सूत्रों के अनुसार यह अफवाहें पाकिस्तान की एजेन्सियों द्वारा फैलाये जा रहे थे, जो भारत में अस्थिरता का माहौल बनाना चाहते है।
यह अफवाह फैलाने वाले संदेश सोशल नेटवर्किंग साइट्स और दूसरी वेबसाइटों द्वारा फैलाये गये थे। ऐसे में भारत सरकार ने ऐसी साइटों की पहचान कर लगभग 254 साइट्स को बंद कर दिया है। फेसबुक और यूट्यूब ने भी ऐसे लोगों के बारे में जानकारी जुटाने में मदद की है, पर ट्विटर ने सरकार का सहयोग करने से मना कर दिया है, जिससे नाराज भारत सरकार ट्विटर के खिलाफ कड़े कदम उठा सकती है।
टेलीकॉम सेक्रेटरी आर चन्द्रशेखर ने कहा कि सरकार का सहयोग न करने वाली साइटों के खिलाफ कानूनी और कड़े कदम उठाये जायेंगे।
सुरक्षा के मद्देनज़र पुणे, कोयंबटूर और बैंगलौर से इन संदेशों को फैलाने वाले कई लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है।
इस पर संचार एवं सूचना तकनीक मंत्री सचिन पाइलेट ने कहा है कि अगर सोशल साइट्स जैसे मंचों का देश के लिए गलत इस्तेमाल किया जा रहा है तो सुरक्षा में सरकार का सहयोग न करने वाली साइटों के खिलाफ हम कड़े कदम उठायेंगे। सुरक्षा से जुड़े मजबूत इंतजाम करने के लिए भारत सरकार अमेरिका से भी मदद ले सकती है।
भारत के गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने सीमापार से अफवाहें फैलाने के सम्बन्ध में पाकिस्तान के गृहमंत्री रहमान मलिक से भी बात की लेकिन उन्होने आरोपों से इनकार कर दिया और कहा कि यदि भारत उन्हें इसके बारे में सबूत देता है तो वह इस पर ज़रूर कार्यवाही करेंगे। जबकि जुटायी गयी जानकारियों से यह पता चला है कि इस प्रकार के संदेश पाकिस्तानी एजेन्सियों के द्वारा फैलाये गये हैं।


















