
लखनऊ। दलितों की मसीहा होने का दावा करने वाली मायावती तो अपने शासन काल में उत्तर प्रदेश के दलितों को आरक्षण का लाभ नहीं दे पायीं लेकिन सोनिया गांधी दलितों को पदोन्नति में आरक्षण दे सकती हैं। आगामी 22 अगस्त को होने वाली सर्वदलीय बैठक में दलितों को आरक्षण मिलने की पूरी उम्मीद है।
सोनिया गांधी के निर्देश पर कांग्रेस की केन्द्र सरकार ने आरक्षण के मुद्दे पर संविधान संशोधन का प्रस्ताव पेश किया है जिस पर सर्वदलीय बैठक कर सभी दलों की राय ली जाएगी।
बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष व दलितों की पुरोधा कही जाने वाली मायावती अपने वोट बैंक यानि दलितों को पदोन्नति में आरक्षण नहीं दिला सकीं। पांच साल तक प्रदेश में शासन करने के बाद भी दलित आरक्षण की मांग करते रहे लेकिन उनकी मांग पूरी नहीं हो सकी। दलितों को इस बात का अफसोस रहा कि जिस पार्टी को अपना समझते थे उसी पार्टी के सत्ता में रहते हुए उनकी मांग अधूरी रह गयी।
ध्यान देने वाली बात यह है कि अपने हक के लिए दलित सरकार से मांग की जो पूरी न हुई तो वह हाई कोर्ट की शरण में गए लेकिन राहत नहीं मिली जिसके बाद वह सुप्रीम कोर्ट भी गए लेकिन वहां पर भी उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। पिछली बसपा सरकार ने उनके आंसू पोछते हुए यह जरूर किया कि सुप्रीम कोर्ट से अपील की थी कि दलितों को पदोन्नतियों में आरक्षण दिया जाना चाहिए लेकिन न्यायालय ने ऐसा करने से मना कर दिया।
अब माया के वोट बैंक पर कांग्रेस ने हाथ डालते हुए सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को ही पलटने का मन बना लिया है। सोनिया गांधी के निर्देश पर इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा 22 अगस्त को बुलायी गयी सर्वदलीय बैठक में सभी दलों के लोग शामिल होंगे और इस बात की पूरी संभावना है कि दलितों को पदोन्नति में आरक्षण मिल भी जाएगा। यदि ऐसा होता है तो मायावती को एक बड़ा झटका लगेगा। ज्ञात हो कि राहुल गांधी व सोनिया गांधी कई बार यह कह भी चुके हैं कि दलितों की हितैषी मायावती नहीं कांग्रेस है और मौका है कि कांग्रेस अपने कथन को साबित करे।


















