
दिल्ली (ब्यूरो)। योगगुरु बाबा रामदेव दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान से जितना भी सरकार को धमकाने की कोशिश करें, चेतावनी दें पर सरकार उनसे डरने वाली नहीं है। सरकार की मंशा है कि वह जनलोकपाल और एसआईटी के गठन को लेकर जिस प्रकार से सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे के आंदोलन को थका मारा उसी प्रकार से रामदेव के आंदोलन को भी थका दिया जाए जिससे वे बिना कुछ कहे ही मैदान छोड़ दें।
वैसे रामदेव के आंदोलन के रणनीतिकार भी इसी मौके की तलाश में हैं कि सरकार कोई रास्ता दे और वे आंदोलन की समाप्ति की घोषणा कर दे।
सूत्र बता रहे हैं कि रामदेव द्वारा बार बार धमकी और अपनी रणनीति के समय में परिवर्तन करने से वे अपने ही आंदोलन को कमजोर कर रहे हैं क्योंकि इससे सरकार में स्पष्ट संदेश जा रहा है कि बाबा रामदेव आंदोलन के मूड में नहीं हैं वे चाहते हैं कि एक रास्ता निकले और वे सम्मानीय तरीके से मैदान से धीरे से निकल जाएं।
सूत्रों ने बताया कि कांग्रेस के प्रबंधकों ने सरकार को सलाह दी है कि अन्ना के आंदोलन की तरह ही रामदेव के आंदोलन को लंबा चलने दिया जाए जिससे लोग अपने धैर्य को खो दें औऱ मैदान में आना बंद कर दें जिससे रामदेव को अपने आप ही मैदान छोड़ देना पड़े औऱ यदि रामदेव अपने आंदोलन के अंतिम दिन सियासी जमीन खोजने की बात करते हैं तो सरकार की यह अपनी बड़ी जीत होगी।
यह इसलिये क्योंकि रामदेव के राजनीति में आने की घोषणा के साथ ही सरकार को यह प्रचार का मौका मिलेगा कि अन्ना की तरह ही रामदेव भी अपने आंदोलन के पीछे एक उद्देश्य लेकर चल रहे थे औऱ वह उद्देश्य राजनीतिक था। गौरतलब है कि बाबा रामदेव अपने आंदोलनों में हमेशा राजनीतिक दल के गठन की बात करते रहे हैं जिससे लोगों में संदेश जाता है कि रामदेव राजनीति में आना चाहते हैं।


















