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एक म्‍यूजिक जिसके बजते ही बहने लगती है खून की नदियां

Written by: अंकुर कुमार श्रीवास्‍तव
Published: Friday, July 27, 2012, 13:21 [IST]

 Two Songs That Can Kill One Is Murder Other Suicide

दो धुन, दो अलग-अलग गीत, इनमें से एक धुन ऐसी है जो जान लेती है जबकि दूसरी धुन वो है जिसे सुन कर लोग खुद अपनी जान दे देते हैं। ये धुन जब भी खुली फिजाओं में गूंजती है तो हवाऐं तक सर्द हो जाती है। इस धुन को सुनने के बाद मुर्दा खून भी उबाल मारने लगता है। बस जैसे ही ये धुन किसी के कानों में दश्‍तक देती है खून की नदियां बहने लगती है। तो पहले उस गीत की बात करते है जिसे सुनने के बाद खुनी खेल शुरु हो जाता है। ऐसा क्‍यों और कब से होता है यह सवाल पूछना फिजूल है क्‍योंकि हिंदूस्‍तान की सरजमी पर ये गीत कब से गाया जा रहा है काई नहीं जानता, मगर इस गीत का असर क्‍या होता है ये सब जानते हैं।

जी हां हम बात कर रहे हैं यूपी के बुदेलखंड की जहां आल्‍हा गीत सुनकर ठाकुर ओकांर सिंह ने सात लोगों की गोली मारकर हत्‍या कर दी। यह महज एक बानगी है वरना सावन माह में यहां और यहां के पास महोबा में रोजना 30 हत्‍याएं होती हैं। यह गीत दुश्‍मन के खात्‍मे के लिये ललकारता है। इस गीत में कहा जाता है कि अगर क्षत्रिय 17 साल तक जिंदा रह जाये तो उसके जीने पर धिक्‍कार है। तरीख गवाह है कि जब-जब यह गीत गाया गया खून की नदियां बह निकली। इस गीत का मकसद और पैगाम सिर्फ एक ही है कि खून का बदला खून और इसी के चलते जब कभी भी यह गीत बजता है बुंदेलखंड की चट्टाने कांप उठती है।

इस गीत में बोला जाता है कि उस इंसान की जिंदगी पर लानत है जिसका दुश्‍मन जिंदा बच जाये। पिछले 800 सालों से यह गीत हकीकत में तब्‍दील हो चुकी है और इसका दूसरा नाम बन गया है कत्‍ल और र्बबादी। तो आईए अब जरा से इस गीत के इतिहास पर चर्चा करते हैं। बुंदेलखंड में 12वीं सदी से दोहराई जा रही इस कहानी के दो अहम किरदार है आल्‍हा और ऊदल। एक वक्‍त था जब इन दोनों सेनापतियों के वीरता की कहानी वीरों के लिया गया जाता था और इसे सुनकर पूरा बुंदेलखंड झूम उठता था। मगर वक्‍त बदला, हालात बदले और दौर भी बदल गया लेकिन इस इलाके का तलवार कल्‍चर नहीं बदला। आज भी आल्‍हा और ऊदल की कहानी सुनकर यहां के लोगों का खून खौल उठता है और शुरु हो जाता है खून से तलवार की प्‍यास बुझाने का सिलसिला।

सावन माह में यहां होने वाले किसी भी आयोजन पर पुलिस की पैनी नजर होती है। कानून की तरफ से खूनी खेल को रोकने के लिये हर संभव प्रयास किया जाता है मगर गीत सुनने के बाद यहां के लोगों को रोक पाने में पुलिस भी विफल हो जाती है और परिणाम कत्‍लेआम के रूप में सामने आता है। ये तो बात थी उस गीत कि जिसे सुनने के बाद खून की नदियां बहने लगती है मगर अब बात करते हैं उस गीत की जिसके बजते ही लोग खुद अपनी जान दे देते हैं।

यह सुनकर थोड़ा अजीब लगेगा कि क्‍या किसी एक धुन को सुनकर कोई अपने हाथों अपनी जिंदगी समाप्‍त कर सकता है मगर यह सच है और इस गाने अबतक सैकड़ों लोगों की जान ले चुका है। सीधे शब्‍दों में कहे तो इसे दुनिया का सबसे मनहूस गीत करार दिया गया है क्‍योंकि जिसने भी इस गाने को सुना जिंदगी उससे बेगानी हो गई और मौत को गले लगाना उसकी मजबूरी बन गई। लब्‍जों में टीस और धुन में जिंदगी से नफरत भरने वाली इस गीत को 1935 में हंगरी के रोजो ने कंपोज किया था। इस गीत का नाम 'ग्‍लूमी संडे' है।

1935 में इस गाने के आते ही एक शो के दौरान एक युवक ने खुद को गोली मार ली और सुसाइड नोट में लिखा कि गाने को सुनने के बाद उसकी जीने की इच्‍छा खत्‍म हो गई। उसके दो दिन बाद ही एक युवती ने फांसी लगा लिया और सुसाइड नोट में लिखा कि ग्‍लूमी संडे सुनने के बाद उसे जिंदगी से नफरत हो गई है और वह मौत को गले लगा रही है। इतना नहीं इसके बाद न्‍यूयॉर्क में एक युवक ने अपने ऑफिस में फांसी लगा लिया और इसने भी खुदकुशी के पीछे ग्‍लूमी संडे का ही हवाला दिया। इस घटना के तुरंत बाद न्‍यूयॉर्क में 82 वर्षीय एक वृद्ध ने पहले ग्‍लूमी संडे की धुन सुनी और फिर सातवीं मंजिल से छलांग लगा दिया। सैकड़ों लोगों को मौत की नींद सुलाने के बाद कई देशों में इस गाने को प्रतिबंधित कर दिया गया है।

English summary
Songs tend to generate heightened emotions in people. Here are two songs that go the most extreme. A song in Bundelkhand has been considered as a song of murder as it has the ability to trigger people who listen to it to go on a murderous rage and kill their rivals. A song from Romania is said to be so dangerous to listen that many people have committed suicide after listening to it.
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