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ओलंपिक में भारत का परचम लहरायेंगे निशानेबाज

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Published: Monday, July 9, 2012, 18:00 [IST]

नयी दिल्ली (भाषा)। भारतीय निशानेबाजों ने हाल के वर्षों में शानदार प्रदर्शन किया है और चार साल पहले बीजिंग में अभिनव बिंद्रा के स्वर्ण पदक के बाद आगामी लंदन ओलंपिक में देश को निशानेबाजों से एक बार फिर अच्छे प्रदर्शन की उम्मीदें होगी। बिंद्रा, गगन नारंग और रंजन सोढ़ी जैसे भारत के स्टार निशानेबाजों ने लंदन खेलों से पहले ट्रेनिंग को अधिक तवज्जो दी है और बयानबाजी से बचे हैं क्योंकि उन्हें पता है कि किसी भी अन्य चीज से अधिक मायने प्रतियोगिता के दिन उनके स्कोर रखेंगे।

राष्ट्रीय कोच सनी थामस के शब्दों में 27 जुलाई से शुरू हो रहे ओलंपिक के दौरान भारतीय अपना स्तर बढ़ाने को बेताब होंगे। दुनिया के शीर्ष निशानेबाजों के बीच भारत की ओर से पदक के प्रबल दावेदार गत चैम्पियन बिंद्रा, नारंग और सोढ़ी होंगे। इन तीनों को भारत की ओर से पदक के प्रबल दावेदारों के रूप में देखा जा रहा है। अन्य भारतीय निशानेबाजों मंे भी प्रतिभा की कोई कमी नहीं है और अपने दिन किसी भी विरोधी को हराने में सक्षम हैं।

बीजिंग ओलंपिक 2008 में भारत के नौ निशानेबाजों ने हिस्सा लिया था जबकि लंदन खेलों के लिए भारत के 11 निशानेबाजों ने क्वालीफाई किया है जो ओलंपिक के इतिहास में सर्वाधिक संख्या है। अंकों के लिहाज से भी भारत के 11 निशानेबाजों की संख्या का अपना महत्व है क्योंकि बीजिंग में 11 अगस्त 2008 को ही बिंद्रा ने 700-5 के स्कोर के साथ पुरुष 10 मीटर एयर राइफल का स्वर्ण पदक जीता था।

विश्व कप और विश्च चैम्पियनशिप सहित विभिन्न अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में नियमित अंतरराल पर पदक जीतकर भारतीय निशानेबाजों ने विश्व स्तर पर अपना लोहा मनवाया है और लंदन खेलों में उन्हें विश्व की सबसे प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में अपना दमखम दिखाने का मौका मिलेगा। थामस हालांकि निशानेबाजों के प्रदर्शन के प्रति आशावान हैं।

उन्होंने कहा, "इस बार निशानेबाजों की संख्या नौ (बीजिंग में) से बढ़कर 11 हो गई है और एथेंस (2004 में राज्यवर्धन सिंह राठौड़ को रजत) तथा बीजिंग में पदक के बाद मनोबल भी बढ़ा है।"

थामस से कहा, "वे लंबे समय से कड़ी ट्रेनिंग कर रहे हैं और कई प्रतियोगिताओं में खेले हैं। हमारा प्रयास में उन्हें ओलंपिक में समय फार्म में शीर्ष पर लाना है। यही मायने रखता है और यह नहीं कि हमने अतीत में क्या किया है। पिछले प्रयासों के कोई मायने नहीं है।"

लंदन खेलों के दौरान हालांकि दबाव से निपटने की भूमिका भी अहम होगी और ऐसे में युवा निशानेबाजों को बिंद्रा जैसे खिलाड़ी की मौजूदगी का फायदा मिलेगा। भारतीय चुनौती की शुरूआत 2010 राष्ट्रमंडल खेलों में तीन स्वर्ण और एक रजत जीतने वाले विजय कुमार करैंगे। वह उद्घाटन समारोह के एक दिन बार 28 जुलाई को 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। विजय के बाद अनुराज सिंह और हीना सिद्धू महिला 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में चुनौती पेश करेंगी। हिना के चयन को लेकर सवाल उठाए गए थे लेकिन इस निशानेबाज के प्रदर्शन पर इसका कोई असर नहीं पड़ा है।

भारत के लिए निशानेबाजी में सबसे बड़ा दिन 30 जुलाई होगा जिस दिन बिंद्रा और नारंग अपने पसंदीदा 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में उतरेंगे। दो दिन बाद भारत की ओर से पदक के प्रबल दावेदारों में शुमार लगातार अच्छा प्रदर्शन करने वाले सोढ़ी डबल ट्रैप में चुनौती पेश करेंगे। पहली बार ओलंपिक में हिस्सा ले रहे सोढ़ी मानवजीत सिंह संधू और शगुन चौधरी के साथ इटली में ट्रेनिंग कर रहे हैं। सोढ़ी दो विश्व खिताब के साथ लंदन रवाना होंगे। इसके अलावा संजीव राजपूत, जायदीप करमरकर और राही सरनोबत भी पदक जीतने में सक्षम हैं।

English summary
Indian shooters are ready for London with bright hopes of adding on to Abhinav Bindra's historic gold-medal feat in Beijing four summers ago.
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