
दिल्ली (ब्यूरो)। वीवीआईपी की सुरक्षा में तैनात करीब 900 कमांडो को हटा दिया गया है। इन कमांडो को आतंकियों से लड़ने के लिए विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी। एनएसजी के एक अधिकारी ने बताया कि ये जवान आतंकवादी हमलों के अलावा विमान अपहरण की घटनाओं से निपटने में भी अपनी अहम भूमिका निभाएंगे। अधिकारी ने बताया कि एनएसजी में इस समय स्पेशल एक्शन ग्रुप (एसएजी) की दो और स्पेशल रेंजर्स ग्रुप (एसआरजी) की तीन यूनिटें हैं।
एसआरजी की तीनों यूनिटों के पास देश के 15 वीवीआईपी सुरक्षा की जिम्मेदारी है। इनमें मुलायम सिंह यादव, लालकृष्ण आडवाणी, मायावती और नरेंद्र मोदी के नाम शामिल हैं। एसआरजी की तीन यूनिटों में पूरी एक यूनिट जिसमें 900 जवान होते हैं को वीवीआईपी सुरक्षा से हटाकर विशेष ट्रेनिंग पर भेजा जा रहा है। आपको बता दें कि एनएसजी में दो प्रकार के कमांडो होते हैं, एक-स्पेशल एक्शन ग्रुप और दूसरा-स्पेशल रेंजर्स ग्रुप। स्पेशल एक्शन ग्रुप को आतंकी हमलों से निपटने की ट्रेनिंग दी जाती है।
हालांकि एनएसजी के अधिकारी ने बताया कि इस फैसले से वीवीआईपी सुरक्षा पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। उनके मुताबिक मौजूदा सभी 15 वीवीआईपी को पुख्ता सुरक्षा मुहैया कराने के लिए दो बटालियन ही पर्याप्त है।
रंजन ने तैयार किए हैं ब्लूप्रिंट
पूर्व महानिदेशक रंजन के मेधेकर द्वारा तैयार नए ब्लूप्रिंट के अनुसार 11 एसआरजी को उनके मौजूदा कार्य से हटा लिया जाएगा और उसे विशेष आतंकवाद निरोधक अभियान के लिए नियमित एसएजी-जैसी इकाई में तब्दील किया जाएगा। नए एनएसजी प्रमुख सुभाष जोशी ने अपने अधिकारियों को इस कार्य को पूरा करने के काम में लगा दिया है। सूत्रों ने बताया कि आपात बल के सुरक्षा दायरे में फिलहाल 15 वीआईपी और वीवीआईपी हैं। अनेक वर्षों के बाद इसकी सुरक्षा के दायरे में आने वाले लोगों की संख्या सबसे कम है और बल ने इस अवसर का इस्तेमाल आतंक निरोध, विमान अपहरण रोधी, बंधक बचाव और विमान में स्काई मार्शलिंग ड्यूटी के अपने मूल चार्टर में लौटने के लिए करने का फैसला किया है। गौरतलब है कि एनएसजी की स्थापना 1984 में संसद के एक कानून के जरिए संघीय आपात बल के तौर पर की गई थी।


















