
इस्लामाबाद। सत्तारूढ़ पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (पीपीपी) ने प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी को सुप्रीम कोर्ट द्वारा अयोग्य ठहराए जाने के बाद इस पद के लिए वरिष्ठ नेता मखदूम शहाबुद्दीन को नामांकित किया है। जियो न्यूज चैनल की आज की खबर में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि प्रधानमंत्री पद के लिए शहाबुद्दीन को नामांकित किए जाने का फैसला पीपीपी के वरिष्ठ नेताओं की बैठक में किया गया। यह बैठक राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी की अध्यक्षता में आज तड़के हुई। खबर के अनुसार, बैठक में यह भी तय किया गया कि नेशनल असेंबली या संसद के निचले सदन का सत्र बृहस्पतिवार को बुलाया जाए ताकि सदन के नए नेता को औपचारिक तौर पर चुना जा सके।
इस घटनाक्रम पर पीपीपी या राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। इससे पहले पीपीपी की केंद्रीय कार्यकारी समिति और पीपीपी नीत सत्तारूढ़ गठबंधन की दो अलग अलग बैठकें हुई थीं। दोनों बैठकों में पीपीपी प्रमुख जरदारी को नया प्रधानमंत्री चुनने के लिए अधिकृत किया गया। समझा जाता है कि इस पद के लिए उम्मीदवार की औपचारिक घोषणा आज दोपहर को पीपीपी के संसदीय दल की बैठक होने के बाद की जाएगी। खबरों में कहा गया है कि बीती रात पीपीपी और इसके सहयोगियों की बैठक के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री गिलानी ने शहाबुद्दीन की उम्मीदवारी को लेकर आपत्ति जताई।
गिलानी और शहाबुद्दीन दोनों ही पंजाब के दक्षिणी भाग के रहने वाले हैं और समझा जाता है कि गिलानी की आपत्ति का कारण उनके बीच राजनीतिक प्रतिद्वन्दि्वता है। सूत्रों ने प्रेस ट्रस्ट को बताया कि सत्तारूढ़ गठबंधन के दलों के नेताओं ने जरदारी को नए प्रधानमंत्री के निर्वाचन के लिए पूरा समर्थन देने का आश्वासन दिया। उन्होंने यह भी कहा कि नेताओं ने गिलानी को अयोग्य ठहराए जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट के साथ कोई टकराव मोल न लेने की सलाह दी है। सूत्रों के मुताबिक, पीपीपी की योजना पंजाब के दक्षिणी भाग में सेराइकी पट्टी से एक नया प्रांत बनाने की है।
यही वजह है कि शहाबुद्दीन प्रधानमंत्री पद के लिए मजबूत दावेदार के तौर पर उभरे हैं। उन्होंने कहा कि जरदारी ने गिलानी को अयोग्य ठहराए जाने के बाद शीघ्र आम चुनाव कराने के आह्वान संबंधी विकल्प को नकार दिया है। सूत्रों ने कहा कि कल की बैठक में शहाबुद्दीन प्रधानमंत्री पद के लिए मजबूत दावेदार के तौर पर उभरे। वर्ष 2008 से गिलानी मंत्रिमंडल में उन्होंने कई मंत्रालयों का जिम्मा संभाला। पीपीपी की एक महत्वपूर्ण सहयोगी पीएमएल क्यू के शीर्ष नेतृत्व ने पंजाब में राजनीतिक प्रतिद्वन्दि्वता के चलते पूर्व रक्षा मंत्री चौधरी अहमद मुख्तार की उम्मीदवारी का विरोध किया था।


















