
पंचकूला। क्या करंट के असर को खत्म करने लिए जमीन में शरीर का दबाना कारगर है। विज्ञान तो इसे नहीं मानता लेकिन अंधविश्वास की कोई सीमा नहीं होती। आधुनिकता और विज्ञान के इस युग में भी अंधविश्वास का नया मामला दयालपुरा में देखने को मिला। यहां करंट लगने से मारे गए एक बच्चे के दोबारा जिंदा होने की उम्मीद में परिजनों ने घंटों तक लाश को जमीन में गर्दन तक दबाए रखा। बच्चे को दोबारा जिंदा होने की उम्मीद में वहां भीड़ लग गई।
इस बीच किसी ने पुलिस का खबर दे दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने देर रात लाश बाहर निकलवाया। मंगलवार को मृतक का अंतिम संस्कार कर दिया गया। दयालपुरा गांव के बहादुर सिंह का 14 वर्षीय बेटा मनप्रीत सिंह की करंट लग गया। उसे अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टर्स ने मनप्रीत को मृत घोषित किया। थाना प्रभारी त्रिलोचन सिंह ने बताया कि बेटे की लाश वापस लाते वक्त किसी ने उन्हें बता दिया कि करंट के शिकार व्यक्ति को जमीन में गाड़ दिया जाए तो करंट जमीन में उतर जाता है और मृतक दोबारा जिंदा हो जाता है।
इस पर परिजनों ने मनप्रीत को गर्दन तक जमीन में गाड़ दिया। किसी करिश्मे की उम्मीद में लोग वहां जमा होने लगे और खबर पाकर देर रात सूचना पाकर पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। डीएसपी अनिल कुमार, तहसीलदार मनदीप सिंह ढिल्लों, सिविल अस्पताल के डॉक्टर और अन्य आला अफसर ने शव बाहर निकलवाया। पूछताछ में पता चला कि बच्चे की लाश जमीन में गाडऩे की सलाह मृतक के रिश्तेदारों ने ही दी थी। एसडीएम की मंजूरी के बाद बिना पोस्टमार्टम के शव का दाह संस्कार किया गया। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव बाहर निकलवाया।


















