
दिल्ली (ब्यूरो)। सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे औऱ टीम अन्ना में कहीं न कहीं कुछ मतभेद तो अवश्य है क्योंकि एक ही मुद्दे पर अन्ना हजारे कुछ कहते हैं तो टीम अन्ना कुछ और। पहले टीम अन्ना हमले बोलती है फिर अन्ना हजारे उसपर सफाई देते हैं। मसलन टीम अन्ना ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को कोयला आवंटन मामले में घेरने की कोशिश की तो दूसरे ही दिन अन्ना ने मनमोहन सिंह को ईमानदार व्यक्ति घोषित करके उन्हें क्लीन चिट दे दी।
फिर टीम अन्ना ने वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी को घेरा तो अन्ना ने कहा कि प्रणब मुखर्जी राष्ट्रपति के लिए सबसे बेहतर हैं क्योंकि वे यूपीए के अन्य मंत्रियों जैसे नहीं हैं। अब टीम अन्ना क्या करे इसे लेकर दोनों के संबंधों पर आम लोगों में चर्चाएं शुरू हो गई हैं क्योंकि एक बार तो एक बार ये घटनाएं बार बार हो रही हैं इसलिए लोगों का कहना है कि टीम अन्ना और अन्ना हजारे में कुछ न कुछ वैचारिक मतभेद तो अवश्य हैं।
अन्ना ने कहा,"प्रणब मुखर्जी यूपीए के दूसरे मंत्रियों की तुलना में अच्छे हैं। उन्होंने कई महत्वपूर्ण निर्णयों को लेने में अहम भूमिका निभाई है। अगर यूपीए ने उनकी बजाय किसी और मंत्री को उम्मीदवार बनाया होता तो मैं उसका विरोध करता।" यानी अन्ना के बयान से साफ है कि वो प्रणब मुखर्जी की दावेदारी के खिलाफ नहीं हैं। आपक बता दें कि टीम अन्ना के अहम सदस्य अऱविंद केजरीवाल ने प्रणब पर दो गंभीर आरोप लगाए थे। पहला आरोप 2007 में चावल निर्यात में घोटाले का और दूसरा आरोप नेवी वॉर रूम लीक केस में। पर दोनों ही मामले में अन्ना ने उन्हें क्लीन चिट दे दी, हालांकि अन्ना से पहले ही कल टीम अन्ना पर प्रणब ने भी पलटवार किया था और अपने बारे में सफाई पेश की थी।
प्रणब ने कहा था, ये आरोप झूठे, पक्षपातपूर्ण, प्रायोजित और स्वार्थ भरे हैं। ये बदनाम करने के इरादे और किसी गुप्त मकसद से लगाए गए हैं। आरोप लगाने वाले जिम्मेदारी से दूर दिखाई देते हैं। प्रणब ने कहा, मेरा नेवी वार रूम लीक मामले और स्कोर्पिन पनडुप्पी सौदे के बीच कोई संबंध नहीं है। मुखर्जी ने कहा, केजरीवाल ने वही आरोप दोहराए हैं, जिनके आधार पर उनके सहयोगी प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। मगर पहले ही दिन इस याचिका को वहां से खारिज कर हाई कोर्ट जाने की इजाजत दी गई थी। हाई कोर्ट ने इस मामले पर सीबीआई जांच भी करवा ली है और अब मामले की सुनवाई हो रही है। मगर केजरीवाल ने ये तथ्य छुपा लिए हैं। मुखर्जी का यह सफाईनामा उनके विशेष कार्य अधिकारी प्रदीप गुप्ता ने टीम अन्ना को भेजा था।


















