
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में किसानों की अत्महत्याओं के बढ़ते मामले एक बार फिर सरकार की नाकामी की ओर इशारा कर रहे हैं। हम यह नहीं कह रहे हैं कि सपा सरकार इसके लिए जिम्मेदार है, लेकिन हां सवाल जरूर उठा रहे हैं कि क्या अखिलेश यादव प्रदेश में बढ़ रहीं किसानों की आत्महत्याओं पर अंकुश लगाने में सफल होंगे।
अगर ताज़ा ममले की बात करें तो महोबा में कर्ज तले दबे किसान ने शुक्रवार को आत्महत्या कर ली। किसान बंसत लाल (65) ने फांसी लगाकर आत्म हत्या की। परिजनों के अनुसार कर्ज से परेशान किसान बसंत ने रस्सी से फंासी लगाकर खुदकुशी की। पुलिस मामले की छानबीन कर रही हे।
महोबा के खन्ना थाना क्षेत्र अन्तर्गत ग्यौढी गांव में रहने वाले राम किशन व परिवार के अन्य लोग सो कर उठे तो उनके होश उड़ गए। पिता बंसतलाल का शव कमरे में बल्ली में लटका था। बेटे राम किशन ने घटना की जानकारी पुलिस को दी। घर वालों के मुताबिक किसान बंसत लाल ने करीब 18 बीघा खेती की जमीन पर इलाहाबाद के यू.पी. ग्रामीण बैंक से बनवाये गये किसान क्रेडिट कार्ड पर कर्ज लिया था। उस पर 50 हजार की रकम चुकाने के लिए वह काफी परेशान था। उन्हें सहकारी समिति का खाद बीज के लिये लिया गया लगभग 20 हजार का कर्ज भी अदा करना था।
मृतक किसान के तीन बेटों के अलावा परिवार में करीब दो दर्जन सदस्य है। आजीविका के लिये परिवार के लोग मजदूरी पर निर्भर है। अक्सर मजदूरी न मिलने पर उसके घर में एक समय का खाना नही बनता था। अपर जिलाधिकारी नीतिश कुमार ने कहा कि किसान ने आत्महत्या क्यों की इसकी जांच कराई जा रही है।
इस मामले को उठाने के साथ-साथ अखिलेश यादव से कहना चाहेंगे कि वो प्रदेश के छात्रों को लैपटॉप व टैबलेट बांटने से पहले किसानों की समस्याओं को सुलझायें। यूपी न तो औद्योगिक क्षेत्र में नंबर वन है और न आईटी क्षेत्र में, तो कम से कम इसे कृषि में पीछे नहीं होने देना चाहिये।


















