
नई दिल्ली। लंबी राजनीतिक उठापटक के बाद आखिरकार संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन ने ममता बनर्जी की चील-चिहाड़ को दरकिनार करते हुए प्रणब मुखर्जी के नाम पर अपनी मुहर लगा दी। सुबह से तमाम बैठकों के बाद यूपीए ने शाम को राष्ट्रपति पद के लिए प्रणब के नाम का ऐलान कर दिया।
शाम चार बजे 10 जनपथ पर हुई बैठक में यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी ने प्रणब मुखर्जी का नाम अपने सभी घटक दलों के सामने रख दिया। इस प्रस्ताव पर तृणमूल कांग्रेस को छोड़ बाकी के सभी सहयोगी दलों ने सहमति प्रदान कर दी। बैठक में ममता बनर्जी उपस्थित नहीं हुईं। हालांकि अपने समर्थन का वादा कर मुलायम सिंह यादव लखनऊ वापस लौट गये।
बैठक के बाद प्रेस वार्ता में सोनिया गांधी ने प्रणब मुखर्जी के नाम का ऐलान किया। सोनिया ने सभी दलों के सांसदों और विधायकों से अपील की कि वे प्रणब मुखर्जी को राष्ट्रपति पद के लिए वोट दें। बैठक से पहले सोनिया गांधी ने लालू प्रसाद यादव से भी मुलाकात की।
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इस ऐलान के बाद अब देखना यह है कि एनडीए अपने प्रत्याशी का ऐलान करती है या नहीं। वैसे सच पूछिए तो प्रणब मुखर्जी के सामने कोई खड़ा नहीं होगा। रही बात एपीजे अब्दुल कलाम ने पहले ही कह दिया है कि जब तक सर्वदलीय सहमति नहीं होगी तब तक वो इस दौड़ में नहीं आयेंगे। लिहाजा उनके प्रत्याशी होने की अटकलें अब खत्म हो गई हैं। अब साफ लग रहा है कि राष्ट्रपति चुनाव इस बार एक तरफा होने वाला है।
बैठक के बाद लालू प्रसाद यादव ने मीडिया से कहा कि प्रणब दा के लिए वो भरपूर समर्थन करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रणब दा को निर्विरोध चुना जाना चाहिये। उन्होंने कहा कि जिस तरह लोगों के नाम इसमें खींचे गये वो गलत किया गया।
वहीं कांग्रेस प्रवक्ता जनार्दन द्विवेदी ने कहा कि प्रणब मुखर्जी से अच्छा प्रत्याशी कोई नहीं हो सकता है। उनके बेहतरीन राजनीतिक करियर का इतिहास गवाह है। यूपीए 1 और यूपीए 2 में उनकी भूमिका हमेशा अहम रही। किसी भी राजनीतिक पार्टी का नाम लीजिये। सभी प्रणब दा की प्रशंसा करते हैं। यही कारण है कि उनके नाम को सभी ने स्वीकार किया। जिस तरह से सोनिया गांधी ने सभी दलों से अपील की है, उससे लगता है कि सभी दल उनके नाम का समर्थन करेंगे।





















