
कोलकाता। एशियन स्वर्ण पदक विजेता महिला एथलीट पिंकी प्रमाणिक के ऊपर बलात्कार का आरोप लगने के बाद उनका लिंग परिक्षण करवाया गया, जिसमें वह पुरूष निकल गयी। इस वाक्या को लेकर उनके अंदर खासा नाराजगी देखी गयी। उन्होंने कहा कि मैने अपनी कई बार ऐसे टेस्ट कराए है। पिंकी को बलात्कार के केस में गिरफ्तार किया गया था। उनकी गिरफ्तारी कही न कही एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एएफआई) को भी कटघरे में खड़ा करता है।
पिंकी पर पुरूष होने का आरोप लगाया गया था। एक निजी अस्पताल में उनकी जांच कराई गयी थी, जिसमें प्रमाणित भी हो गया था कि पिंकी पुरूष है। सबसे बड़ा सवाल उठता है कि क्या पिंकी के पास मेडल रहेगा या नहीं? इस मामले ने विश्व एथलीट संगठन पर सवालियां निशान खड़ा कर दिया है। क्योंकि किसी भी टूर्नामेंट से पहले खिलाड़ी का शारीरिक परीक्षण किया जाता है।
पिंकी की जांच किये अधिकारियों ने कहा कि सरकारी अस्पताल में पिंकी की जांच कराई जाएगी उसके बाद ही उनको कोर्ट में पेश किया जाएगा, लेकिन अगर निजी अस्पताल की जांच मान्य नहीं है तो क्यों कराई गयी। अगर सरकारी अस्पताल की जांच में उनका उनके पुरूष होने की खबर गलत निकलती है तो प्रशासन उनकी बदनामी के लिए क्या मुआवजा देगी?
अगर विशेषज्ञों की माने तो आनुवंशिक कारण से भी दोहरा सेक्सुअल गुण हो सकते है। ऐसी बाते हमारे समाज के लिए आम सी है। सबसे बड़ा सवाल है कि एथलीट के टूर्नामेंट के समय होने वाला शारीरिक परीक्षण क्या महज केवल एक दिखावा होता था। अगर इस मामले में पिंकी दोषी पायी जाती है तो सबसे बड़ा दोषी एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एएफआई) होगा।
सूत्रों के अनुसार पूर्व एथलीट खिलाड़ी पीटी ऊषा पिंकी के समर्थन में आ गयी है। ऊषा ने पिंकी के खिलाफ किसी भी तरह की कार्रवाई होने से पहले एएफआई पर निशाना साधा है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय एथलीट बोर्ट ने निशाना साधते हुए कहा कि टूर्नामेंट से पहले शारीरिक टेस्ट कराने की जिम्मेदारी बोर्ड की होती है। इसलिए अगर पिंकी गलत पायी जाती है तो सबसे बड़ा दोषी अंतरराष्ट्रीय एथलीट बोर्ड होगा।
सबसे बड़ा सवाल तो यह है कि पिंकी को खेल छोड़े तीन साल हो चुका है, इस बीच शरीर में किसी भी तरह का परिवर्तन गलत नहीं होगा।


















