
चंडीगढ़। हरियाणा में बच्चों व लड़कियों की सुरक्षा के लिए बनाए गए आश्रय घरों में कई सालों से घिनौना खेल खेला जा रहा था। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) को इन आश्रय घरों में बच्चों व लड़कियों के यौन शोषण की कई बार शिकायतें मिलीं। राज्य के महिला एवं बाल विकास विभाग को कई बार चेताया भी गया, लेकिन किसी ने मासूम बच्चों और लड़कियों के शोषण की शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया है।
प्रदेश सरकार ने रोहतक के अपना घर व यमुनानगर के बालकुंज में यौन शोषण की शिकायतें उजागर होने के बाद हालांकि प्रत्येक आश्रय स्थल में बच्चों की स्वास्थ्य जांच तथा स्वैच्छिक संगठनों के पंजीकरण का आदेश जारी किया है, लेकिन इस तरह की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कार्य योजना का अभी तक कोई खुलासा नहीं किया है।
हाई कोर्ट में बुधवार को पेश की गई रिपोर्ट के बाद जांच कमेटी तथा पुलिस महानिदेशक द्वारा गठित विशेष जांच दल भी आमने-सामने हो गए हैं। हाई कोर्ट की दो सदस्यीय कमेटी में शामिल अनिल मल्होत्रा तथा सुदीप्ति शर्मा ने पुलिस द्वारा गठित विशेष जांच दल के औचित्य पर ही सवाल खड़े कर राज्य सरकार को नए सिर से कार्य योजना बनाने के लिए मजबूर कर दिया है।
पुलिसकर्मी संदेह के घेरे में हाई कोर्ट की जांच कमेटी की दलील है कि राज्य के जिन 12 आश्रय स्थलों में 100 से अधिक बच्चों व लड़कियों से बात की गई है, उनमें से अधिकतर ने पुलिसकर्मियों के यौन शोषण के आरोपों में घिरे होने का खुलासा किया है। कमेटी को यमुनानगर, करनाल, पानीपत, सोनीपत, गुडग़ांव, बहादुरगढ़, रोहतक व भिवानी में कोई आश्रय स्थल ऐसा नहीं मिला है, जिसमें पुलिस पर अंगुली नहीं उठाई गई है। एसआइटी की जांच जारी दूसरी तरफ पुलिस महानिदेशक रंजीव दलाल द्वारा गठित विशेष जांच दल अभी किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाया है।
अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक एमएस मान को इस जांच दल की जिम्मेदारी सौंपी गई है। महिला एवं बाल तथा समाज कल्याण मंत्री गीता भुक्कल का कहना है कि इस संवेदनशील मुद्दे पर राज्य सरकार बेहद गंभीर है। उन्होंने विपक्ष के नेताओं से इस मुद्दे पर राजनीति नहीं करने का आग्रह करते हुए कहा कि दोषियों को किसी तरह की रियायत नहीं दी जाएगी।


















