
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में स्थित रायसीना हिल्स के लिए दौड़ जारी है। इस दौड़ में कभी एपीजे अब्दुल कलाम आगे होते हैं, तो कभी प्रणब मुखर्जी और हामिद अंसारी और कभी सोमनाथ चटर्जी। रायसीना हिल्स के लिए कांग्रेस कार्यालय में पिछले 48 घंटों से घमासान जारी है। यही कारण है कि देश के हर कोने में आज यह चर्चा का विषय बनी हुई है। चलिये इसी मौके पर इतिहास के कुछ पन्ने पलटे जायें।
रायसीना हिल्स वह जगह है, जहां राष्ट्रपति भवन बना हुआ है। राष्ट्रपति भवन के निर्माण के पीछे एक लंबा इतिहास है। संक्षिप्त में कहें तो रायसीना हिल्स पर बना राज भवन देश का सबसे महत्वपूर्ण भवन है। यहां पर राष्ट्रपति का आवास और कार्यालय दोनो स्थित हैं। इसके चारों तरफ हरियाली और साथ में हैं एक से एक खूबसूरत इमारतें- संसद भवन, इंडिया गेट, विजय चौक और राजपथ।
रायसीना हिल्स का नाम पड़ा मल्चा गांवों के रायसीना परिवारों से। असल में इस इमारत को बनाने के लिए रायसीना के 300 परिवारों की जमीनों का अधिग्रहण किया गया और करीब 4000 एकड़ जमीन पर इमारत बनाई गई। इसे बनाने के लिए 4 साल निर्धारित किये गये थे, लेकिन विश्वयुद्ध के कारण इसे बनाने में 19 साल लगे। 23 जनवरी 1931 को पहली बार अंग्रेजों के जमाने में वॉयसरॉय ऑफ इंडिया लॉर्ड इरविन यहां रहने आये। 1950 के पहले तक इसे वॉयसरॉय हाउस कहा जाता था और इस इलाके का नाम लुटियंस था।
रायसीना हिल्स काफी उचाईं पर स्थित है, लगभग 18 मीटर। रायसीना हिल्स पर वॉयसरॉय हाउस बना हुआ था और अंग्रेजों का शासन वहीं से चल रहा था। 1911 में अंग्रेजों ने भारत की राजधानी कलकत्त (अब कोलकाता) से दिल्ली स्थानांतरित करने के लिए रायसीना हिल्स के बाकी के इलाके का अधिग्रहण किया और नये प्रशासनिक भवन बनाये।
अब देखना यह है कि शानदार रायसीना हिल्स पर प्रतिभा देवी सिंह पाटिल के बाद किसका साम्राज्य होता है। वैसे फिलहाल जो नाम चल रहे हैं उनमें प्रणब मुखर्जी, डा. एपीजे अब्दुल कलाम, हामिद अंसारी, सोमनाथ चटर्जी, आदि प्रमुख हैं।


















