
दिल्ली (ब्यूरो)। यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती सत्ता से बेदखल क्या हुई हर तरफ से प्रहार शुरू हो गए हैं। इस बार अखिलेश सरकार ने नहीं बल्कि केंद्र सरकार ने माया के सपने पर हथौड़ा चलाया है। मायावती के ड्रीम प्रोजेक्ट गंगा एक्सप्रेस वे को केंद्र ने हरी झंड़ी देने से मना कर दिया है।
केंद्र सरकार ने बताया कि नोएडा से बलिया तक गंगा एक्सप्रेस वे को पर्यावरण मंजूरी नहीं दी गई है। पर्यावरण एवं वन मंत्री जयंती नटराजन ने गोरख प्रसाद जायसवाल और डॉक्टर संजय सिंह के सवालों के एक प्रश्न के लिखित जवाब में कहा कि पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन (ईआईए) अधिसूचना 2006 के तहत ईआईए संबंधी अध्ययन कराने के लिए विचारार्थ विषयों की स्वीकृति के मकसद से जेपी गंगा इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरपोरेशन लिमिटेड ने ग्रेटर नोएडा से बलिया तक आठ लेन के एक्सप्रेस वे के विकास का एक प्रस्ताव प्राप्त हुआ था। चूंकि यह प्रस्ताव परियोजना के परामर्शदाता (जेपी गंगा इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरपोरेशन) की ओर से आया था इसलिए इसे लौटा दिया गया। ईआइए अधिसूचना 2006 के तहत परियोजना मंजूरी की शर्ते परियोजना प्रस्तावक की ओर से दिया जाना चाहिए था।
वहीं, अखिलेश सरकार ने मायावती को भ्रष्ट बताने के लिए कई मोर्चे पर जंग छेड़ दी है। हाथी घोटाला के आड़ में वह मायावती को कई विवादों में घसीटना चाह रही है जिससे लोगों में माया के खिलाफ मुहिम बन सके। अखिलेश ने लगे हाथ उनका नाम एनआरएचएम घोटाले में भी घसीट लिया है। अब देखना है कि माया इतने सारे मोर्चे पर कैसे जीत हासिल कर पाती हैं। वैसे चर्चा है कि गंगा एक्सप्रेस वे को मूर्त रूप लेने के लिए मायावती सरकार का इंतजार करना पड़ेगा।

















