
दिल्ली (ब्यूरो)। खुर्जा के एक गांव में बेटा ने अपने पिता के जिद पर उनकी तेरहवीं जीते-जीते करा दिया। इस जश्न में करीब तीन हजार लोग शामिल हुए। लोगों ने जमकर भोजन किया। इस आधुनिक युग के तेरहवीं में महिला कलाकारों ने फिल्मी धुनों पर ठुमके लगाए। लोगों ने जमकर डांस किया। ऐसा लगा जैसे रजनीश की कामना पूरी हो गई है। वो मौत को भी जश्न की तरह मनाने के पक्ष में थे।
खुर्जा जंक्शन क्षेत्र के बुढै़ना गांव निवासी 65 वर्षीय महिपाल ने जीवित रहते हुए अपने इकलौते बेटे चंद्र प्रकाश से अपनी तेरहवीं जश्नपूर्वक मनाने के लिए कहा था। हालांकि शुरू में बेटे को बड़ा अजीब लगा । यह सामाजिक मर्यादा के खिलाफ है। लेकिन पिता के बार -बार कहने पर वह तैयार हो गया । उसके पिता का कहना था कि मैं सब कुछ अपने जिंदा रहते देख लेना चाहता हूं। मौत के बाद कौन तेरहवीं में आया हमे क्या पता। महिपाल की इच्छा है कि सभी लोग जिंदा रहते तेरहवीं मनाए। इससे समाज में एक अच्छी परंपरा की नींव पडे़गी।
आधुनिक तेरहवीं कार्यक्रम में शिरकत करने आए लोग और रिश्तेदार भी इस आयोजन से हैरत में पड़ गये। तेरहवीं में रंगमंच की महिला कलाकारों ने फिल्मी धुनों पर ठुमके लगाए। ब्रह्मभोज में करीब तीन हजार लोगों ने भोजन ग्रहण किया । पिता की इच्छा के अनुसार सोमवार को तेरहवीं का यादगार रंगारंग जश्न मनाया। इस दौरान रंगमंच के महिला कलाकारों ने फिल्मी गीतों पर डांस किया। ब्रह्मभोज में पहुंचे लोग भी इस अनोखे इंतजाम को देखकर दंग रह गए। वे भी तेरहवीं में जमक डांस किए। तेरहवीं के लिए बनाए गए पंडाल ब्रह्मभोज में स्वादिष्ट कचौड़ी, सब्जी, लड्डू परोसा गया। महिपाल के बेटे चंद्र प्रकाश ने बताया कि उसके पिता की इच्छा थी कि जीते जी उनकी तेरहवीं करवाई जाए। पिता चाहते थे कि तेरहवीं का रस्म वह खुद देखना चाहते थे। महिपाल की पत्नी का कई वर्ष पूर्व देहांत हो चुका था।


















