
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे अमीरों की जेब पर भारी बोझ पड़ने वाला है। यह है करोड़पति कर। इसके अंतर्गत देश के करोड़पतियों को अतिरिक्त धन कर के रूप में सरकार को देना होगा। इस पर बात करना इसलिए प्रासंगिक है, क्योंकि अमेरिका में बराक ओबामा प्रस्तावित कर चुके हैं। इसमें कोई शक नहीं कि भविष्य में ऐसा कोई कर भारत में आ जाये।
ऑस्ट्रेलिया के ताकतवर श्रमिक संघों ने सरकार पर इस तरह का कर लगाने के लिए दबाव बनाया है। सूत्रों की माने तो इस कर को लगाये जाने की सबसे अहम वजह अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा हैं। वहां का श्रमिक संघ ओबामा के तथाकथित 'बफे रूल' की मांग कर रहा है।
इस रूल के अंतर्गत पैसे वालों को एक अलग तरह का कर देना होता है। जिसमें गरीबों और मध्यमवर्गीय लोगों के कर की उगाही करोड़पतियों और अरबपतियों से होती है।
आपको बता दें की एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है की, ऑस्ट्रेलियन काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस एक सुधार पर बातचीत कर रहे हैं। जिनमें कम और मध्यम आय वर्ग पर पड़ने वाले कर का बोझ करोड़पतियों और अरबपतियों पर डाला जाएगा। श्रमिक संगठनों की डिमांड है कि खनन क्षेत्र के अरबपतियों को अपना आयकर रिटर्न फाइल करते वक्त इस तरह कर देना चाहिए।
एसीटीयू के सहायक महासचिव टिम लॉयन्स ने जानकारी देते हुए बताया की, 'जहां तक पैसे वाले लोगों पर कर लगाने की बात है तो उस लिहाज से आयकर प्रणाली में बिल्कुल समानता नहीं है।'
गौरतलब है की श्रमिक संगठन इस मुद्दे पर अगले सप्ताह सिडनी में होने वाली बैठक में चर्चा करेंगे साथ ही उन्होंने ये भी कहा है की फेडरल बजट में कर सुधारों की घोषणा की गई लेकिन धनी लोग कर का उचित हिस्सा अदा करें, इस दिशा में अभी और किया जाना बाकी है। इस मुद्दे पर जानकारी देते हुए सूत्रों ने ये भी बताया की इस रूल को लेकर अमीर वर्ग में काफी रोष दिख रहा है जहाँ अगर ये रूल लागू कर लिया जाता है तो देश की अर्थव्यवस्था पर खासा फर्क पड़ सकता है।
रही बात भारत की तो इसमें कोई शक नहीं है कि अमेरिका के दबाव में भारत को भी ऐसा कोई कर लागू करना पड़े, क्योंकि विश्व की अर्थव्यवस्था की कुंजी आज भी अमेरिका के ही पास है। यदि भारत में ऐसा सिस्टम लागू किया जाये तो देश के आम आदमी को कुछ राहत जरूर मिल सकती है, वहीं करोड़पतियों के लिए यह चिंता का सबब हो सकता है। आपसे एक सवाल जरूर है कि क्या भारत में भी ऐसा कर लाया जाना चाहिये?


















