
दिल्ली (ब्यूरो)। गुजरात कैडर के एक आईएएस ने मंगलवार को वह मिसाल कायम कि जो शायद ही कभी किसी ने किया हो। एक तरफ जहां देश में दुल्हों की बोली लगती हो वहीं दूसरी ओर एक आईएएस ने सामूहिक विवाह में अपनी शादी रचा करके समाज के उन ठेकेदारों के मुंह पर तमाचा जड़ दिया है जो बिना दहेज के लड़की की डोली नहीं उठने देते।
साबरकांठा जिले की खेड़ब्रम्हा तहसील के निवासी विजय खराड़ी आदिवासी समुदाय डूंगरी गरासिया से आते हैं। गत वर्ष जब वह आईएएस में चयनित हुए तो उनके समाज की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। विजय इस समुदाय के पहले आईएएस हैं। विजय वर्तमान में मध्य गुजरात के नर्मदा जिले में सहायक कलेक्टर के पद पर तैनात हैं। गत दिनों जब डूंगरी गरासिया समुदाय के उपाध्यक्ष बीएम खाणमा व अन्य ने उन्हें समाज के सामूहिक विवाह सम्मेलन में शामिल होने का न्योता दिया तो उन्होंने खुद भी समारोह में ही शादी की इच्छा जताई।
पिता और परिजन सहमत नहीं थे, लेकिन विजय ने उन्हें मना लिया। विजय का कहना है कि सामूहिक विवाह में शादी करके धन की बर्बादी को रोका जा सकता है। इससे बचे धन का इस्तेमाल समाज में शिक्षा-जागरूकता के लिए किया जाए तो कायापलट हो सकता है। विजय मंगलवार को सामूहिक विवाह सम्मेलन में पड़ोसी गांव भिलोड़ा की सीमा के साथ सात जन्मों के बंधन में बंध गए। इस समारोह में विजय और सीमा समेत 34 जोड़े विवाद बंधन में बंधे। विजय 2009 बैच के आईएएस हैं।


















