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आरटीई का बोझ सरकार वहन करेंगी दूसरे छात्र नहीं: सिब्बल

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आरटीई का बोझ सरकार वहन करेंगी दूसरे छात्र नहीं: सिब्बल

दिल्ली (ब्यूरो)। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद शिक्षा के अधिकार कानून (आरटीई) के तहत स्कूलों को 25 फीसदी सीट आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को निशुल्क शिक्षा देने के लिए आरक्षित रखनी होगी। कयास लगाया जा रहा है कि इन बच्चों की शिक्षा पर पड़ने वाला बोझ निजी स्कूल अन्य छात्रों पर डाल देंगे।

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने इन आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा कि मैं नहीं समझता ऐसा होगा। मेरा मानना है कि संसाधन जुटाने के अन्य तरीके निकाले जाएंगे। उन्होंने कहा कि जिन स्कूलों को सरकार से किसी तरह का लाभ नहीं मिल रहा है उसकी भरपाई सरकार करेगी।

उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार सुनिश्चित करेगी कि आठवीं कक्षा के बाद जब कानून के प्रावधान समाप्त हो जाते हैं तब भी कमजोर तबके के छात्रों को शिक्षा मिलती रहे। आरटीई के तहत स्कूलों को आर्थिक रूप से पिछड़े छह से 14 वर्ष के बच्चों को निशुल्क शिक्षा देनी होगी। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस कानून की संवैधानिक वैधता को कायम रखा है।

 
English summary
The government has sought to assure parents that the Supreme Court’s verdict making free education to 25 per cent children from weaker sections mandatory in private schools will not prompt the school managements to increase other students’ fee in order to shift the burden.
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