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यह है भारत की नई 'मोस्‍ट वॉन्‍टेड लिस्‍ट'

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यह है भारत की नई 'मोस्‍ट वॉन्‍टेड लिस्‍ट'

किशोर त्रिवेदी

जब भी इंडियाज़ मोस्‍ट वॉन्‍टेड की बात आती है तो आपके ज़हन में सिर्फ दाऊद इब्राहिम, मौलाना मसूद अजहर या टाईगर मेनन जैसे लोगों के नाम आते होंगे। लेकिन अब एक नई मोस्‍ट वॉन्‍टेड लिस्‍ट सामने आयी है, जिसमें बड़े-बड़े क्रिमिनल्‍स नहीं बल्कि एक अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर की पत्रिका है, अमेरिका के थिंक टैंक में सबसे पुराने सलाहकार, कम्‍युनिस्‍ट नेता, कांग्रेस मुख्‍यमंत्री, रिटायर्ड आईपीएस, मुस्लिम नेता और कई लोग हैं इस मोस्‍ट वॉन्‍टेड सूची में। इनका जुर्म यह है कि इन लोगों ने गुजरात के मुख्‍यमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना की गुस्‍ताखी की है।

हमें सिखाया गया है कि उसकी प्रशंसा करो, जिसकी लोग प्रशंसा करें। लेकिन हाल ही की घटनाओं ने लोगों को सिखाया कि जो लोग नरेंद्र मोदी की प्रशंसा करें उनका बहिष्‍कार कर दो। उन लोगों की हर तरह से घोर निंदा करो। यह एक बड़ा उदाहरण है, जो बताता है कि हम अपने अभिव्‍यक्ति के अधिकार का इस्‍तेमाल करते वक्‍त चुन-चुन कर शब्‍दों का इस्‍तेमाल करते हैं। दुर्भाग्‍यवश इस प्रकार के लोगों की संख्‍या काफी कम है। ऐसे लोग मीडिया या सामाजिक समूहों से मिलकर नकारात्‍मक अभियान चलाने का काम ही करते हैं और लोगों को बरगलाने की कोशिश करते हैं। ये लोग असलियत से ऊपर उठकर बात करते हैं। ऐसे लोग निरंतर ऐसे काम करते रहते हैं और खुद को जनता का नेता बताते हैं।

सबसे पहले हम टाइम पत्रिका की बात करें तो उसने 26 मार्च 2012 के संस्‍करण में नरेंद्र मोदी को अपने कवर पेज पर प्रकाशित किया। पत्रिका ने कहा कि मोदी ने गुजरात का सर्वांगीण विकास किया। इस अंक के प्रकाशन के बाद भी टीवी चैनलों के स्‍टूडियो में पत्रिका के खिलाफ भड़ास निकाली गई। वहीं एक वरिष्‍ठ पत्रकार ने यहां तक कहा कि वो खुश होंगे अगर पत्रिका 'द इक्‍नॉमिस्‍ट' मोदी की तस्‍वीर छापेगी। इससे पता चलता है कि वो पत्रकार इस बात से अनजान थे कि इस पत्रिका के कवर पेज पर मोदी को एक साल में तीन बार छापा गया है।

पत्रिका टाइम और ब्रूकिंग्‍स हाल ही दो अपराधी हैं, जिन्‍हें लोगों ने इस मोस्‍ट वॉन्‍टेड की सूची में डाला। अब तक का सबसे खराब उदाहरण मौलाना वस्‍तनवी का है, जिन्‍हें दारुल उलूम, देवबंद का मुखिया बनाया गया था। वो देश के सबसे प्रतिष्ठित मुस्लिम धर्मगुरु हैं, लेकिन उनके भाग्‍य ने भी साथ नहीं दिया, जब उन्‍होंने कहा कि गुजरात में मुसलमानों के साथ भेद-भाव नहीं होता है और मुसलमानों को 2002 के दंगे भूल जाने चाहिये। इतना कहने पर उन्‍हें इतनी निंदा मिली कि अंतत: उन्‍हें गद्दी से उतार दिया गया। उसके बाद वस्‍तनवी ने अपना रुख बदल दिय, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी...

वस्‍तनवी की मुलाकात केरल के मुस्लिम धर्मगुरु एपी अब्‍दुल्‍लाकुट्टी से हुई। 2009 में वो सीपीआईएम के सांसद थे, जब उन्‍होंने नरेंद्र मोदी को गुजरात के लिए 100 में 100 अंक दिये। उनका इस्‍तीफा मांगने के लिए उनकी पार्टी के लिए यह काफी था। फिर क्‍या था उन्‍हें पार्टी से बाहर का रास्‍ता दिखा दिया गया। बाद में वही अब्‍दुल्‍लाकुट्टी कांग्रेस के टिकट पर 2009 के लोकसभा चुनाव जीत कर आये।

इस में प्रख्‍यात अभिनेता को भी नहीं छोड़ा गया। आज पूरा देश अमिताभ बच्‍चन के उन प्रयासों की बात कर रहा है, जो वो गुजरात पर्यटन के ब्रांड एंबेस्‍डर के रूप में कर रहे हैं। लेकिन अमिताभ के लिए सब कुछ इतना आसान नहीं है। जैसे ही वो गुजरात के ब्रांड एंबेस्‍डर बने, उसके बाद से निंदा होनी शुरू हो गई। मामला उस समय उबाल पर आ गया, जब महाराष्‍ट्र के मुख्‍यमंत्री अशोक चव्‍हाण ने उनके साथ मंच पर बैठने से इंकार कर दिया। इसका सीधा तात्‍पर्य यही है कि मोदी को भूल जाओ, चाहे भले ही आप गुजरात के एंबेस्‍डर हों।

मोदी के विरुद्ध बात करने वाले लोगों ने यह दिखा दिया कि जब भी मोदी की बात आये, तब बिना सोचे समझे विरोध करना ही है, चाहे सामने कोर्ट या सरकार ही क्‍यों न हो। सुप्रीम कोर्ट द्वारा एसआईटी के गठन के मुद्दे पर भी कड़ी आलोचनाएं की गईं। एसआईटी का गठन हुआ और जब वो असली रंग में आयी तो उसने मोदी के एक मंत्री को हिरासत में लिया। यह एक पारदर्शी लोकतांत्रिक संगठन है। लेकिन फिर भी उसके खिलाफ एक के बाद एक अभियान चलाये गये। कई बार सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ भी लोग खड़े हुए।

एसआईटी प्रमुख आरके राघवन पर भी जमकर कीचड़ उठाला गया, वो भी यह कहकर कि वो मोदी के हितैशी हैं। मोदी के सूचना प्रौद्योगिकी में किये गये कार्यों की सराहना करने वाले अतिरिक्‍त सचिव का तबादला कर दिया गया।

मोदी की प्रशंसा करने वाले मोस्‍ट वॉन्‍टेड लोगों की सूची से अन्‍ना हजारे भी नहीं बच सके। जब अन्‍ना ने मोदी को मॉडल सीएम कहा तो उन्‍हीं की टीम की मेधा पाटकर ने उन पर हमला बोल दिया। इसी प्रकार महबूबा मुफ्ती की बात करें तो उन्‍होंने उन व्‍यापारियों की तारीफ की, जिन्‍होंने गुजरात में निवेश किया। वहीं शीला दीक्षित ने जब मोदी की तारीफ की तो कांग्रेस ने उन पर शब्‍द वापस लेने का दबाव डाल दिया।

कुल मिलाक रदेखा जाये तो गुजरात में नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया विकास किसी भी नजर से विवादित नहीं है, शायद इसीलिए लोग नकारात्‍मक दृष्टि से इसकी तरफ देखते हैं। इन लोगों की नजर में टाइम पत्रिका, अमिताभ बच्‍चन, शीला दीक्षित और अन्‍ना हजारे लोग किसी मोस्‍ट वॉन्‍टेड से कम नहीं।

English summary
There is a list of ‘India’s Most Wanted’ which includes TIME magazine, Amitab Bachcha, Anna Hazare, Maulana Vastanvi and many more. Their crime- they ‘dared’ to praise Narendra Modi.
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