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गौरेया के लिए मुसीबत बन चुकीं ऊंची इमारतें

सोमवार, फरवरी 13, 2012,14:21 [IST]
Sparrow Bird
दिल्ली (ब्यूरो)। देश के सभी शहर कबूतरों के लिए आश्रय स्थल बनते जा रहे हैं। दूसरी ओर यह गौरेया के लिए मुसीबत बन गए हैं। नतीजा है कि गौरैया कम होती जा रही है और कबूतर अपनी आबादी बढ़ाने में कामयाब हो रहे हैं। ऊंची इमारतों में गौरेया नहीं रह सकती जबकि कबूतरों को ऊंचे मकान ही पसंद हैं। लगातार सिकुड़ती हरियाली और भोजन की कमी से गौरेया भारत ही नहीं, बल्कि दुनियाभर के महानगरों से गायब होती जा रही है। शहरों में छोटे मकानों की जगह गगनचुंबी इमारतें बढ़ने से गौरेया की जगह लगातार कबूतर लेते जा रहे हैं।

केंद्रीय पर्यावरण और वन मंत्रालय भी मानता है कि देशभर में गौरेया की संख्या में कमी आ रही है। देश में मौजूद पक्षियों की 1200 प्रजातियों में से 87 संकटग्रस्त की सूची में शामिल हैं। हालांकि बर्ड लाइफ इंटरनेशनल ने गौरेया (पासेर डोमेस्टिक) को अभी संकटग्रस्त पक्षियों की सूची में शामिल नहीं किया है, लेकिन सलीम अली पक्षी विज्ञान केंद्र कोयंबटूर और प्राकृतिक विज्ञान केंद्र मुंबई समेत विभिन्न संगठनों के अध्ययन में यह बात सामने आई है कि इनकी तादाद लगातार घट रही है। केंद्रीय पर्यावरण व वन मंत्रालय के एक अफसर का कहना था कि जैसे-जैसे शहरों में छोटे-छोटे मकानों की जगह ऊंची इमारतें लेती जाएंगी, गौरेया की जगह कबूतर बढ़ेंगे। ऊंची इमारतों में गौरेया नहीं रह सकती जबकि कबूतरों को ऊंचे मकान ही पसंद हैं।

गौरेया और कबूतर उन पक्षियों में हैं जो मनुष्य के आसपास आसानी से रह सकते हैं। खास बात यह है कि गौरेया को ज्यादातर लोग पसंद करते हैं जबकि कबूतर को भगाना चाहते हैं। पक्षी प्रेमी संगठनों के अध्ययन महानगरों में गौरेया की संख्या में कमी आने के कई कारण गिनाते हैं। प्रदूषण और शहरीकरण को इसका प्रमुख कारण माना गया है। इसके अलावा गौरेया के रहने व घोेंसले बनाने की जगह लगातार घट रही है। छोटे मकानों में तो उन्हें ठिकाना मिल जाता था, लेकिन ऊंची इमारतों में नहीं मिल पा रहा। खेती खत्म होने व शहरों में रहन-सहन की शैली बदलने से उन्हें भोजन नहीं मिल पा रहा है। खास बात यह है कि गौरेया के संरक्षण को लेकर 20 मार्च को विश्व घरेलू गौरेया दिवस मनाया जाता है लेकिन इसके बावजूद इस पक्षी पर संकट कायम है। पूरी दुनिया में गौरेया का यही हाल है। ब्रिटेन में तो ज्यादातर गौरेया अब गायब हो चुकी हैं।

English summary
India has seen a massive decline of sparrows in recent years. They are vanishing from many big cities, but are still not uncommon in small towns and villages. But pigeon population on increase.
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