
दिल्ली (ब्यूरो)। हाईकोर्ट ने रेप और हत्या के मामले मे निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए रेप करनेवाले को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। युवक ने प्रकाश ने एक नाबालिग से रेप किया फिर सबूत मिटाने के लिए उसे जला कर मार डाला।
अदालत ने आरोपी पर सात हजार रुपये जुर्माना भी किया है। न्यायमूर्ति एस. रविंद्र भट्ट और न्यायमूर्ति एसपी गर्ग की खंडपीठ ने फैसले में कहा कि निचली अदालत ने सभी तथ्यों का गहराई से अध्ययन नहीं किया। साक्ष्यों से स्पष्ट है कि आरोपी घटना के समय पीड़िता के साथ था और दुष्कर्म किया। स्वयं को फंसता देख उसने नाबालिग की हत्या कर आग लगा दी। निचली अदालत का फैसला न्यायपूर्ण नहीं है। अत: वे आरोपी को आजीवन कारावास की सजा देते हैं।
अदालत ने आरोपी प्रकाश को 22 फरवरी को निचली कोर्ट में समर्पण करने का निर्देश दिया है। दिलचस्प पहलू है कि निचली अदालत ने 18 जनवरी 2000 को हुई घटना के आरोपी प्रकाश को 22 मई 2004 को हत्या, साक्ष्य नष्ट करने व संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
अदालत ने उसे दुष्कर्म के आरोप में रिहा कर दिया था। प्रकाश ने फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी तो हाईकोर्ट ने 29 जनवरी 2009 को निचली अदालत का फैसला खारिज करते हुए कहा कि अदालत ने मृतका के भाई एवं चश्मदीद गवाह के बयान ठीक ढंग से नहीं लिए। अदालत ने निचली अदालत को पुन: बयान लेकर फैसला देने का निर्देश दिया। निचली अदालत ने तीन गवाहों के बयान दर्ज कर आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए 20 अगस्त 2009 को सभी आरोपों से बरी कर दिया। हाईकोर्ट में सरकारी वकील ऋचा कपूर ने तर्क रखा कि निचली अदालत ने मृतका के भाई के बयानों पर ध्यान नहीं दिया।
उधर हाईकोर्ट ने लिव-इन-रिलेशन में अतरो देवी को साथी अनूप सिंह को जलाने पर मिली आजीवन कारावास की सजा रद्द कर दी, मगर उसे गैरइरादतन हत्या में दोषी ठहराते हुए सात वर्ष कैद की सजा सुना दी। न्यायमूर्ति एस. रविंद्र भट्ट और न्यायमूर्ति एसपी गर्ग की खंडपीठ ने आरोपी अतरो देवी के उस तर्क को खारिज कर दिया कि उसे फर्जी मामले में फंसाया है क्योंकि मृतक का भाई संपत्ति पर कब्जा करना चाहता है। आरोपी युवावस्था में ही विधवा हो गई और करीब 17 वर्ष से उसके अनूप से संबंध थे।
पिछले 10 वर्ष से वे बिना विवाह के लिव-इन में रह रहे थे। अदालत ने कहा कि घटना आरोपी के घर में हुई और वह यह साबित करने में असफल रही है कि घटना कैसे हुई और अनूप कैसे जला। उसने आग बुझाने का प्रयास क्यों नहीं किया और उसे तुरंत अस्पताल क्यों नहीं ले गई। अत: वह दोषी जरूर है। अदालत ने कहा आरोपी ने अनूप को केरोसिन डालकर जलाया, मगर इरादा हत्या का नहीं था अत: वे मिली सजा संबंधी फैसले को रद्द कर उसे गैरइरादतन हत्या के आरोप में दोषी ठहराते हैं।
अदालत ने आरोपी पर सात हजार रुपये जुर्माना भी किया है। न्यायमूर्ति एस. रविंद्र भट्ट और न्यायमूर्ति एसपी गर्ग की खंडपीठ ने फैसले में कहा कि निचली अदालत ने सभी तथ्यों का गहराई से अध्ययन नहीं किया। साक्ष्यों से स्पष्ट है कि आरोपी घटना के समय पीड़िता के साथ था और दुष्कर्म किया। स्वयं को फंसता देख उसने नाबालिग की हत्या कर आग लगा दी। निचली अदालत का फैसला न्यायपूर्ण नहीं है। अत: वे आरोपी को आजीवन कारावास की सजा देते हैं।
अदालत ने आरोपी प्रकाश को 22 फरवरी को निचली कोर्ट में समर्पण करने का निर्देश दिया है। दिलचस्प पहलू है कि निचली अदालत ने 18 जनवरी 2000 को हुई घटना के आरोपी प्रकाश को 22 मई 2004 को हत्या, साक्ष्य नष्ट करने व संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
अदालत ने उसे दुष्कर्म के आरोप में रिहा कर दिया था। प्रकाश ने फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी तो हाईकोर्ट ने 29 जनवरी 2009 को निचली अदालत का फैसला खारिज करते हुए कहा कि अदालत ने मृतका के भाई एवं चश्मदीद गवाह के बयान ठीक ढंग से नहीं लिए। अदालत ने निचली अदालत को पुन: बयान लेकर फैसला देने का निर्देश दिया। निचली अदालत ने तीन गवाहों के बयान दर्ज कर आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए 20 अगस्त 2009 को सभी आरोपों से बरी कर दिया। हाईकोर्ट में सरकारी वकील ऋचा कपूर ने तर्क रखा कि निचली अदालत ने मृतका के भाई के बयानों पर ध्यान नहीं दिया।
उधर हाईकोर्ट ने लिव-इन-रिलेशन में अतरो देवी को साथी अनूप सिंह को जलाने पर मिली आजीवन कारावास की सजा रद्द कर दी, मगर उसे गैरइरादतन हत्या में दोषी ठहराते हुए सात वर्ष कैद की सजा सुना दी। न्यायमूर्ति एस. रविंद्र भट्ट और न्यायमूर्ति एसपी गर्ग की खंडपीठ ने आरोपी अतरो देवी के उस तर्क को खारिज कर दिया कि उसे फर्जी मामले में फंसाया है क्योंकि मृतक का भाई संपत्ति पर कब्जा करना चाहता है। आरोपी युवावस्था में ही विधवा हो गई और करीब 17 वर्ष से उसके अनूप से संबंध थे।
पिछले 10 वर्ष से वे बिना विवाह के लिव-इन में रह रहे थे। अदालत ने कहा कि घटना आरोपी के घर में हुई और वह यह साबित करने में असफल रही है कि घटना कैसे हुई और अनूप कैसे जला। उसने आग बुझाने का प्रयास क्यों नहीं किया और उसे तुरंत अस्पताल क्यों नहीं ले गई। अत: वह दोषी जरूर है। अदालत ने कहा आरोपी ने अनूप को केरोसिन डालकर जलाया, मगर इरादा हत्या का नहीं था अत: वे मिली सजा संबंधी फैसले को रद्द कर उसे गैरइरादतन हत्या के आरोप में दोषी ठहराते हैं।













