
दिल्ली (ब्यूरो)। टैक्स देने वालों के लिए खुशखबरी है। सरकार इस बार के बजट में होम लोन पर टैक्स में छूट की सीमा बढ़ा सकती है वैसे इस कदम से आवास क्षेत्र में कर्ज के उठाव को भी बढ़ावा मिलेगा। समझा जाता है कि सरकार होम लोन के लिए दिए गए ब्याज पर आयकर छूट की सीमा को तीन लाख रुपये कर सकती है। हालांकि अभी यह 1.5 लाख रुपये है। गौरतलब है कि वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी आम बजट 16 मार्च को पेश करेंगे।
सूत्रों ने कहा कि सरकार आगामी बजट में होम लोन पर कर कटौती की सीमा बढ़ाने पर विचार कर रही है। फिलहाल घर खरीदने को लिए गए कर्ज पर कर योग्य आमदनी में से ब्याज के रूप में डेढ़ लाख रुपये तक की कटौती उपलब्ध होती है। इसके अलावा उपभोक्ता मूलधन के भुगतान पर भी एक लाख की सीमा तक कर छूट मिलती है। वैसे यह भी एक लाख रुपये की सालाना कर बचत पर मिलने वाली छूट का ही हिस्सा है। हर बीतते साल के साथ मकानों के दाम बढ़ रहे हैं। ब्याज दरें भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। इसलिए इस सीमा को बढ़ाने की जरूरत है। आर्थिक विकास दर में गिरावट को थामने के लिए उद्योग जगत भी कुछ इसी तरह की माग कर रहा है। उद्योग चैंबर फिक्की के महासचिव राजीव कुमार ने कहा कि आवास कर्ज के ब्याज पर टैक्स छूट की सीमा को ब्याज दरों के अनुकूल कर 2.5 लाख रुपये किया जाना चाहिए।
सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी के मुताबिक, व्यक्तिगत कर कटौती की सीमा को मौजूदा 2.5 लाख से 5 लाख रुपये किया जाना चाहिए। इसमें से 3 लाख रुपये की छूट ब्याज भुगतान पर मिलनी चाहिए। दो लाख रुपये की कटौती केवल कर्ज की मूलराशि के भुगतान पर होनी चाहिए। इसी तरह की राय जाहिर करते हुए एसोचैम और पीएचडी चैंबर ने कहा कि कटौती की सीमा ब्याज और मूल राशि दोनों पर बढ़नी चाहिए।
सूत्रों ने कहा कि सरकार आगामी बजट में होम लोन पर कर कटौती की सीमा बढ़ाने पर विचार कर रही है। फिलहाल घर खरीदने को लिए गए कर्ज पर कर योग्य आमदनी में से ब्याज के रूप में डेढ़ लाख रुपये तक की कटौती उपलब्ध होती है। इसके अलावा उपभोक्ता मूलधन के भुगतान पर भी एक लाख की सीमा तक कर छूट मिलती है। वैसे यह भी एक लाख रुपये की सालाना कर बचत पर मिलने वाली छूट का ही हिस्सा है। हर बीतते साल के साथ मकानों के दाम बढ़ रहे हैं। ब्याज दरें भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। इसलिए इस सीमा को बढ़ाने की जरूरत है। आर्थिक विकास दर में गिरावट को थामने के लिए उद्योग जगत भी कुछ इसी तरह की माग कर रहा है। उद्योग चैंबर फिक्की के महासचिव राजीव कुमार ने कहा कि आवास कर्ज के ब्याज पर टैक्स छूट की सीमा को ब्याज दरों के अनुकूल कर 2.5 लाख रुपये किया जाना चाहिए।
सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी के मुताबिक, व्यक्तिगत कर कटौती की सीमा को मौजूदा 2.5 लाख से 5 लाख रुपये किया जाना चाहिए। इसमें से 3 लाख रुपये की छूट ब्याज भुगतान पर मिलनी चाहिए। दो लाख रुपये की कटौती केवल कर्ज की मूलराशि के भुगतान पर होनी चाहिए। इसी तरह की राय जाहिर करते हुए एसोचैम और पीएचडी चैंबर ने कहा कि कटौती की सीमा ब्याज और मूल राशि दोनों पर बढ़नी चाहिए।













