
इस्लामाबाद। सोमवार को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी की किस्मत का फैसला होना है। कोर्ट की अवमानना के मामले में सुप्रीम कोर्ट कल अपना फैसला सुनाएगा। ऐसे में प्रधानमंत्री गिलानी ने पहले ही संकेत दिया है कि अगर सुप्रीम कोर्ट उन्हें दोषी करार देता है तो वे अपने पद से इस्तीफा दे देंगे।
कोर्ट की अवमानना के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गिलानी को 13 फरवरी को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया था। गिलानी पर कोर्ट की अवमानना का मामला चल रहा है। कोर्ट ने उन्हें भ्रष्टाचार मामले में राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के खिलाफ कार्रवाई करने के आदेश दिए थे। गिलानी ने कोर्ट के आदेश की अवहेलना करते हुए जरदारी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने भ्रष्टाचार के मामलों में बच निकलने में मदद करने वाला एनआरओ कानून रद्द करते हुए गिलानी को आदेश दिया था कि वे स्विस बैंकों में जमा जरदारी की संपत्ति की जानकारी जुटाएं। इसके लिए कोर्ट ने उन्हें स्विट्जरलैंड की सरकार को चिट्ठी लिखने का आदेश भी दिया था।
जिसे गिलानी ने नहीं माना। इसके बाद कोर्ट में अपनी पेशी के दौरान गिलानी ने अपनी सफाई में कहा था कि संविधान के तहत देश के राष्ट्रपति के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा सकती। राष्ट्रपति को संवैधानिक छूट है।
अब लगातार कोर्ट की अवमानना के मामले में गिलानी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई भी हो सकती है। लग रहा है कि भ्रष्टाचार में बुरी तरह लिप्त राष्ट्रपति जरदारी को बचाने के चक्कर में गिलानी अपनी कुर्सी गंवा बैठेंगे। वैसे गिलानी का नाम भी भ्रष्टाचार के कई ममलों से जुड़ा है।
कोर्ट की अवमानना के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गिलानी को 13 फरवरी को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया था। गिलानी पर कोर्ट की अवमानना का मामला चल रहा है। कोर्ट ने उन्हें भ्रष्टाचार मामले में राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के खिलाफ कार्रवाई करने के आदेश दिए थे। गिलानी ने कोर्ट के आदेश की अवहेलना करते हुए जरदारी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने भ्रष्टाचार के मामलों में बच निकलने में मदद करने वाला एनआरओ कानून रद्द करते हुए गिलानी को आदेश दिया था कि वे स्विस बैंकों में जमा जरदारी की संपत्ति की जानकारी जुटाएं। इसके लिए कोर्ट ने उन्हें स्विट्जरलैंड की सरकार को चिट्ठी लिखने का आदेश भी दिया था।
जिसे गिलानी ने नहीं माना। इसके बाद कोर्ट में अपनी पेशी के दौरान गिलानी ने अपनी सफाई में कहा था कि संविधान के तहत देश के राष्ट्रपति के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा सकती। राष्ट्रपति को संवैधानिक छूट है।
अब लगातार कोर्ट की अवमानना के मामले में गिलानी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई भी हो सकती है। लग रहा है कि भ्रष्टाचार में बुरी तरह लिप्त राष्ट्रपति जरदारी को बचाने के चक्कर में गिलानी अपनी कुर्सी गंवा बैठेंगे। वैसे गिलानी का नाम भी भ्रष्टाचार के कई ममलों से जुड़ा है।












