इलाहाबाद। चुनावी घमासान में हर पार्टी जनता को लुभाने की कोशिश कर रही है। चाहे नेता हो या अभिनेता हर कोई राजनीतिक पार्टियों के लिए वोट मांग रहा है। इसी क्रम में आज इलाहाबाद की धरती पर कांग्रेस को अग्निपथ में पास करने के लिए कांचा चीना उतरने वाला है। जी हां आपने सही समझा हम बात कर रहे हैं अभिनेता संजय दत्त की जो आज से यूपी में कांग्रेस के लिए वोट मांगेंगे। इस बात की पुष्टि पार्टी ने कर दी है।
आपको बता दें कि हाल ही में पार्टी की प्रदेश अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी ने मंशा जताई थी कि अभिनेता संजय दत्त को कांग्रेस के लिए प्रचार करना चाहिए। क्योंकि वो लोकप्रिय नेता तो हैं ही साथ ही उनकी बहन और पिता दोनों ही लंबे अरसे से कांग्रेस का ही हिस्सा रहे हैं।
यही नहीं अभिनेता संजय दत्त ने भी कहा था कि उनका परिवार नेहरू जी के जमाने से ही कांग्रेस से जुड़ा हुआ था। उनके पिता सुनील दत्त अंतिम समय तक भी कांग्रेसी ही रहे। उनका समाजवादी पार्टी में जाना ही उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी भूल थी। जिसे वो मौका मिलते ही सुधारना चाहते हैं। इसलिए वो आज से खुलकर कांग्रेस के लिए चुनाव प्रचार करेंगे।
गौरतलब है साल 2009 के आम चुनाव में अभिनेता संजय दत्त ने अमर सिंह के कहने पर समाजवादी पार्टी ज्वाइन की थी। उन्हें लखनऊ से प्रत्याशी भी बनाया जा रहा था लेकिन कानूनी परमिशन ना मिलने से संजय दत्त चुनाव नहीं लड़ पाये।
अमर सिंह से अच्छे मैत्री संबध होने की वजह से संजय दत्त सपा में आये थे लेकिन जब अमर सिंह की ही खटपट सपा वालों से हो गयी तो संजय दत्त ने साल 2010 में सपा पार्टी छोड़ दी थी।
आपको बता दें कि हाल ही में पार्टी की प्रदेश अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी ने मंशा जताई थी कि अभिनेता संजय दत्त को कांग्रेस के लिए प्रचार करना चाहिए। क्योंकि वो लोकप्रिय नेता तो हैं ही साथ ही उनकी बहन और पिता दोनों ही लंबे अरसे से कांग्रेस का ही हिस्सा रहे हैं।
यही नहीं अभिनेता संजय दत्त ने भी कहा था कि उनका परिवार नेहरू जी के जमाने से ही कांग्रेस से जुड़ा हुआ था। उनके पिता सुनील दत्त अंतिम समय तक भी कांग्रेसी ही रहे। उनका समाजवादी पार्टी में जाना ही उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी भूल थी। जिसे वो मौका मिलते ही सुधारना चाहते हैं। इसलिए वो आज से खुलकर कांग्रेस के लिए चुनाव प्रचार करेंगे।
गौरतलब है साल 2009 के आम चुनाव में अभिनेता संजय दत्त ने अमर सिंह के कहने पर समाजवादी पार्टी ज्वाइन की थी। उन्हें लखनऊ से प्रत्याशी भी बनाया जा रहा था लेकिन कानूनी परमिशन ना मिलने से संजय दत्त चुनाव नहीं लड़ पाये।
अमर सिंह से अच्छे मैत्री संबध होने की वजह से संजय दत्त सपा में आये थे लेकिन जब अमर सिंह की ही खटपट सपा वालों से हो गयी तो संजय दत्त ने साल 2010 में सपा पार्टी छोड़ दी थी।














