दिल्ली (ब्यूरो)। आजम खां की नाराजगी के सामने मुलायम पस्त हो गए हैं। मुसलमानों का नेता बनने के लिए सपा नेता आजम खां और शाही इमाम में तनातनी रहती है। मुलायम ने शाही इमाम का साथ लिया तो आजम खां ने उन्हें साफ शब्दों में कह दिया कि आप शाही इमाम और मुझमें किसी एक को चुन लें। अगर आपने इरादा नहीं बदला तो मैं कांग्रेस में जा सकता हूं। यह सुनते ही मुलायम के होश उड़ गए और उन्होंने आजम खां को फिलहाल यह कह कर शांत करा दिया है कि यूपी में सैयद अहमद बुखारी के साथ सभाएं नहीं करेंगे।
लंबे अर्से के बाद शाही इमाम से बेहतर रिश्ते बनने के बाद समाजवादी पार्टी प्रदेश में उनका भरपूर लाभ उठाना चाहती थी। इसके लिए पार्टी ने शाही इमाम के साथ लगभग आधा दर्जन सभाएं किए जाने की रणनीति बनाई गई थी। सूत्रों ने बताया कि बदले हालात में सपा ने इससे हाथ खींच लिए हैं। अब उनके साथ कोई जनसभा नहीं किए जाने की संभावना है। इससे मुलायम सिंह जहां आजम खां की नाराजगी को कम कर सकेंगे, वहीं मुसलिम मतदाताओं में कोई भ्रम उत्पन्न नहीं होगा।
पिछले सप्ताह मौलाना बुखारी ने लखनऊ जाकर सपा का समर्थन करने का ऐलान किया है। मुलायम सिंह यादव के शाही इमाम को तरजीह दिए जाने से आजम खां बुरी तरह तिलमिलाए हुए हैं। उन्होंने जहां शाही इमाम को सिर्फ नमाज पढ़ाए जाने की सलाह दी है, वहीं मौलाना बुखारी ने दीवाना, सिर फिरा और कुंठित कह कर आजम खां पर हमला किया है।
मौलाना बुखारी का मानना है कि आजम खां को दिमागी बुखार चढ़ता है और वो दाढ़ी वाले सम्मानित लोगों के बारे में उल्टा सीधा बोलते रहते हैं। पिछले तीन-चार दिन से इस तरह के बयानों से मुलायम सिंह यादव काफी परेशान हैं। हालांकि सपा इसे दोनों की निजी लड़ाई मान कर अपने आपको इससे अलग रखे हुए है। लेकिन मुसलिम राजनीति में इस मसले पर जोरों से चर्चा की जा रही है। वर्ष 2004 में जब मुलायम सिंह मुख्यमंत्री बने थे, तब मिल्ली काउंसिल और आल इंडिया पर्सनल लॉ बोर्ड के एक डेलिगेशन को भी आजम खां ने इसी तरह बेइज्जत किया था।
जब इसकी शिकायत सपा अध्यक्ष को मिली तो उन्होंने मुसलिम नेताओं से खेद व्यक्त किया था। इसके बाद से सपा ने प्रदेश के मुसलिम मामलों से उन्हें अलग रखा था। सपा ने जामा मसजिद के शाही इमाम अहमद बुखारी से समर्थन हासिल कर कांग्रेस को पटकनी देने की कोशिश की। अलबत्ता आजम खां ने अपनी नाराजगी उसी दिन बता दी थी। लखनऊ में शाही इमाम के साथ मुलायम की प्रेस कांफ्रेंस में उन्हें भी आमंत्रित किया गया था लेकिन वो इसमें शामिल नहीं हुए थे। आजम के रुख के बाद सपा और शाही इमाम के बीच हुई दोस्ती पर सपा में ही बिखराव होता दिखाई देने लगा था। बहरहाल मुलायम ने आजम को तो मना लिया है देखना है आजम को मनाने से शाही इमाम तो नाराज नहीं हो जाएंगे।
लंबे अर्से के बाद शाही इमाम से बेहतर रिश्ते बनने के बाद समाजवादी पार्टी प्रदेश में उनका भरपूर लाभ उठाना चाहती थी। इसके लिए पार्टी ने शाही इमाम के साथ लगभग आधा दर्जन सभाएं किए जाने की रणनीति बनाई गई थी। सूत्रों ने बताया कि बदले हालात में सपा ने इससे हाथ खींच लिए हैं। अब उनके साथ कोई जनसभा नहीं किए जाने की संभावना है। इससे मुलायम सिंह जहां आजम खां की नाराजगी को कम कर सकेंगे, वहीं मुसलिम मतदाताओं में कोई भ्रम उत्पन्न नहीं होगा।
पिछले सप्ताह मौलाना बुखारी ने लखनऊ जाकर सपा का समर्थन करने का ऐलान किया है। मुलायम सिंह यादव के शाही इमाम को तरजीह दिए जाने से आजम खां बुरी तरह तिलमिलाए हुए हैं। उन्होंने जहां शाही इमाम को सिर्फ नमाज पढ़ाए जाने की सलाह दी है, वहीं मौलाना बुखारी ने दीवाना, सिर फिरा और कुंठित कह कर आजम खां पर हमला किया है।
मौलाना बुखारी का मानना है कि आजम खां को दिमागी बुखार चढ़ता है और वो दाढ़ी वाले सम्मानित लोगों के बारे में उल्टा सीधा बोलते रहते हैं। पिछले तीन-चार दिन से इस तरह के बयानों से मुलायम सिंह यादव काफी परेशान हैं। हालांकि सपा इसे दोनों की निजी लड़ाई मान कर अपने आपको इससे अलग रखे हुए है। लेकिन मुसलिम राजनीति में इस मसले पर जोरों से चर्चा की जा रही है। वर्ष 2004 में जब मुलायम सिंह मुख्यमंत्री बने थे, तब मिल्ली काउंसिल और आल इंडिया पर्सनल लॉ बोर्ड के एक डेलिगेशन को भी आजम खां ने इसी तरह बेइज्जत किया था।
जब इसकी शिकायत सपा अध्यक्ष को मिली तो उन्होंने मुसलिम नेताओं से खेद व्यक्त किया था। इसके बाद से सपा ने प्रदेश के मुसलिम मामलों से उन्हें अलग रखा था। सपा ने जामा मसजिद के शाही इमाम अहमद बुखारी से समर्थन हासिल कर कांग्रेस को पटकनी देने की कोशिश की। अलबत्ता आजम खां ने अपनी नाराजगी उसी दिन बता दी थी। लखनऊ में शाही इमाम के साथ मुलायम की प्रेस कांफ्रेंस में उन्हें भी आमंत्रित किया गया था लेकिन वो इसमें शामिल नहीं हुए थे। आजम के रुख के बाद सपा और शाही इमाम के बीच हुई दोस्ती पर सपा में ही बिखराव होता दिखाई देने लगा था। बहरहाल मुलायम ने आजम को तो मना लिया है देखना है आजम को मनाने से शाही इमाम तो नाराज नहीं हो जाएंगे।














