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2जी : गांगुली ने कहा, सीधे बल्ले से किया फैसला

शुक्रवार, फरवरी 3, 2012,13:51 [IST]
AK Ganguly
दिल्ली (ब्यूरो)। 2जी लाइसेंसों को रद्द कर सरकार को कड़ा संदेश देने वाले उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश अशोक कुमार गांगुली गुरुवार को सेवामुक्त हो गए। उन्होंने अपनी सेवा के अंतिम दिन कहा कि उन्होंने हमेशा सीधे बल्ले से खेलने का प्रयास किया। उच्चतम न्यायालय बार संघ द्वारा आयोजित अपने विदाई समारोह में भावुक न्यायमूर्ति गांगुली ने क्रिकेट में अपनी दिलचस्पी दिखाते हुए कहा कि वरिष्ठ खिलाडि़यों को युवाओं के लिए जगह बनानी चाहिए ताकि भारतीय टीम ऑस्ट्रेलिया में अपने खराब प्रदर्शन से उबर सके।

इंग्लैंड के पूर्व क्रिकेट कप्तान डेविड क्रांपटन की पुस्तक एंड ऑफ ऐन इनिंग का जिक्र करते हुए न्यायमूर्ति गांगुली ने कहा, इसी तरह यह न्यायाधीश के रूप में मेरी पारी का समापन है। मुझे नहीं पता कि मैंने अपनी पारियां कैसे खेलीं, लेकिन मैंने हमेशा सीधे बल्ले से खेलने की कोशिश की। यह आपको तय करना है कि मैं कैसे खेला। इस दौरान च्च्चतम न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश एस एच कपाडि़या, शीर्ष अदालत के अनेक न्यायाधीश, एटार्नी जनरल जीई वाहनवती और संघ के अध्यक्ष पीएच पारिख मौजूद थे। गांगुली ने न्यायाधीश के तौर पर अपने 18 साल के कार्यकाल को याद करते हुए कहा, आज दोपहर बाद जब मैंने अपने अर्दली अशोक को चोगा उतारकर दिया तो मिले जुले भाव थे। मैं यह सोचकर खुश हुआ कि मुझे आज शाम को एसएलपी नहीं पढ़नी होंगी।

मैंने उसकी आंखों में देखा तो वो थोड़ी नम थीं और मैं भी भावुक हो गया। न्यायमूर्ति गांगुली ने गुरूदेव रवींद्रनाथ ठाकुर के एक कथन का भी जिक्र किया। बाद में एक टीवी चैनल से बातचीत में उन्होंने कहा कि यदि युवा क्रिकेटरों की जगह पुरानों को मौका दिया जाता है तो हारना मजबूरी होगी, क्योंकि हर खिलाड़ी का खेलने का अपना समय होता है। उन्होंने इशारा करते हुए कहा कि विवियन रिचडर््स, ब्रायन लारा, गैरी सोबर्स, सुनील गावस्कर और सौरभ गांगुली ने सही समय पर संन्यास ले लिया। न्यायमूर्ति गांगुली ने कहा, युवाओं को लाया जाना चाहिए अन्यथा हमारा भविष्य ऐसा ही रहेगा। प्रधान न्यायाधीश एस एच कपाडि़या ने रामकृष्ण मिशन के माध्यम से जनसेवाओं के अलावा कानून, खेल और दर्शनशास्त्र में न्यायमूर्ति गांगुली के गहरे ज्ञान की प्रशंसा की।
English summary
The verdict cancelling 122 2G spectrum licenses in a way justified the statement by justice Ganguly, who retired on Thursday after serving the judiciary for 18 years.
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