
जींद। धुम्रपान करना आम बात है। इसे रोकने के लिए राज्य सरकारें योजनाएं, जुर्माना आदि चलाती हैं लेकिन इसे पूरी तरह प्रतिबंधित नहीं करती। यह खबर समाज के लिए प्रेरक तो है किंतु इसके साथ अंधविश्वास भी कहीं न कहीं उजागर होता है। हरियाणा के जींद जिले में का बुल्लाखेड़ी गांव। यहां करीब 400 सालों से कोई धुम्रपान नहीं करता। इसकी वजह समाजिक बुराई न होकर अपशगुन है।
गांव वाले मानते हैं कि धूम्रपान करने से उनके साथ कोई अप्रिय घटना हो जाती है। करीब 1800 की आबादी वाले इस गांव में जाट जाति के चहल गोत्र की संख्या सबसे ज्यादा है, जबकि ब्राह्मण व बाल्मीकि परिवार भी रह रहा है। इस गांव में कोई भी व्यक्ति व्यक्ति हुक्का, बीड़ी, सिगरेट इत्यादि का सेवन नहीं करता।
गांव की सरपंच सरोज ने बताया कि गांम में धूम्रपान पर प्रतिबंध गांव बसने के समय से ही लागू है। पूर्वजों द्वारा तत्कालीन राजा उदय सिंह को दिए गए वचन पर ग्रामीण आज भी कायम है। गांव में कोई भी दुकानदार बीड़ी-सिगरेट नहीं बेचता, जबकि गांम में आने वाले मेहमानों को भी गांव से बाहर जाकर धुम्रपान करना पड़ता है। जींद जिला के अंतिम छोर पर बसा यह गांव उन हाई प्रोफाइल मेट्रो शहरों में रहने वाले लोगों के लिए सीख दे रहा।
गांव वाले मानते हैं कि धूम्रपान करने से उनके साथ कोई अप्रिय घटना हो जाती है। करीब 1800 की आबादी वाले इस गांव में जाट जाति के चहल गोत्र की संख्या सबसे ज्यादा है, जबकि ब्राह्मण व बाल्मीकि परिवार भी रह रहा है। इस गांव में कोई भी व्यक्ति व्यक्ति हुक्का, बीड़ी, सिगरेट इत्यादि का सेवन नहीं करता।
गांव की सरपंच सरोज ने बताया कि गांम में धूम्रपान पर प्रतिबंध गांव बसने के समय से ही लागू है। पूर्वजों द्वारा तत्कालीन राजा उदय सिंह को दिए गए वचन पर ग्रामीण आज भी कायम है। गांव में कोई भी दुकानदार बीड़ी-सिगरेट नहीं बेचता, जबकि गांम में आने वाले मेहमानों को भी गांव से बाहर जाकर धुम्रपान करना पड़ता है। जींद जिला के अंतिम छोर पर बसा यह गांव उन हाई प्रोफाइल मेट्रो शहरों में रहने वाले लोगों के लिए सीख दे रहा।













