
वॉश्ग्टिन। अमेरिकी न्यूज पेपर 'द वॉल स्ट्रीट जनरल' में छपी एक खबर के मुताबिक अमेरिका को शक है कि अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में अमेरिकी दूतावास को निशाना बनाकर किए गए आतंकी हमले के पीछे पाकिस्तानी खूफिया एजेंसी आईएसआई का हाथ हो सकता है। काबुल हमले पर चर्चा करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के साथ बैठक में हिस्सा लेंगे। जिसके बाद वे इस पर अपनी प्रतिक्रिया दे सकते हैं।
न्यूज पेपर में अमेरिका के एक सीनियर सुरक्षा अधिकारी का बयाना छापा गया है। जिसमें उन्होंने कहा है कि आईएसआई इस तरह के आतंकी हमलों को बढ़ावा देता रहा है। जिस वजह से यह जांच की जा रही है कि इस हमले के पीछे भी आईएसआई का हाथ तो नहीं है। काबुल में हुए आतंकी हमले में मारे गए आतंकवादी में से एक के पास मिले मोबाइल में ऐसा जिक्र है जिससे यह बात सामने आ रही है कि उसका आईएआई से रिश्ता हो सकता है। अमेरिका का शक इसलिए भी है क्योंकि 2008 और 09 में काबुल में भारतीय दूतावास पर हुए आतंकी हमलों में आईएसआई का हाथा था।
इसी साल 2 मई को पाकिस्तान के एबटाबाद में अमेरिका के दुश्मन नंबर वन ओसामा बिन लादेन के मिलने के बाद से अमेरिका पाकिस्तान को शक की नजर से देख रहा है। अमेरिका पहले ही पाकिस्तान को चेतावनी दे चुका है कि वह अपने यहां चल रही आतंकी गतिविधियों को तुरंत बंद करे। अमेरिका अधिकारी इस हमले के पीछे हक्कान गुट का हाथ होने की आशंका जाहिर कर रही है। जिसका संबंध आईएसआई से रहा है। अमेरिका के इन आरोपों पर आईएसआई ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। पाकिस्तान सरकार ने इन आरोपों को निराधार बताया है।





















