Thought for the day
Your page will load in ...
Close Ad X
Advertisement
English ગુજરાતી ಕನ್ನಡ മലയാളം தமிழ் తెలుగు
 
Share This Story

अफ़गानिस्तान में मतदान के दौरान हिंसा

Published: Saturday, September 18, 2010, 17:20 [IST]
Courtesy: BBCHindi.com
अफ़गानिस्तान में मतदान के दौरान हिंसा

अफ़ग़ानिस्तान में संसदीय चुनाव के दौरान अलग-अलग हमलों में कम से कम 14 लोग मारे गए हैं. मृतकों में एक पुलिसकर्मी भी शामिल है.

उल्लेखनीय है कि तालेबान ने पहले से ही मतदान के दौरान हमलों की धमकी दे रखी थी. मतदान समाप्त होने के बाद तालेबान ने कहा है कि उनके लोगों ने 150 से ज़्यादा मतदान केंद्रों पर हमले किए.

अधिकारियों का कहना है कि बग़लान प्रांत में हुए एक हमले में छह लोग मारे गए हैं, जबकि बलख के पास एक बम धमाके में तीन लोगों की मौत हुई है.

राजधानी काबुल और जलालाबाद से भी छिटपुट हिंसा हुई.

चुनाव अधिकारियों का कहना है कि तालेबान की धमकियों के बाद भी 90 प्रतिशत मतदान केंद्रों को वोटिंग के लिए खुला रखा गया था.

चुनावों में संसद के निचले सदन की 249 सीटों के लिए कुल 2500 उम्मीदवार मुक़ाबले में हैं.

मतदान के लिए सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए थे.

जहाँ तक मतदान की बात है तो देश के अधिकांश हिस्सों में इसकी शुरुआत बहुत धीमी रही. ख़ास कर देश के दक्षिणी हिस्सों में मतदान का प्रतिशत कम रहा.

पूरे अफ़ग़ानिस्तान में कोई एक करोड़ मतदाता दर्ज हैं.

काबुल से बीबीसी संवाददाता लिस डुसेट के अनुसार संसदीय चुनाव को अफ़ग़ानिस्तान में जनमत तालेबान के ख़िलाफ़ करने के लिए इस साल किए गए प्रयासों की अंतिम कड़ी माना जा रहा है.

इससे पहले इस साल अफ़ग़ानिस्तान मुद्दे पर लंदन में एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन हुआ था. फिर अफ़ग़ानिस्तान में शांति सम्मेलन या जिरगा का आयोजन हुआ जिसमें तालेबान से वार्ताएं करने पर सहमति बनी. और अब संसदीय चुनाव.

कहने की ज़रूरत नहीं कि आज का मतदान तालेबान के बढ़े दबदबे की पृष्ठभूमि में हुआ. हिंसा और धमकियों के ज़रिए तालेबान ने अफ़ग़ानिस्तान के उन कई प्रांतों में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है, जहाँ पहले उसका प्रभाव नगण्य था.

अफ़ग़ानिस्तान में अमरीकी अगुआई वाले अंतरराष्ट्रीय बल के प्रमुख जनरल डेविड पैट्रियस भले ही दावा करें कि अफ़ग़ान सुरक्षा बलों के सहयोग से उनके सैनिकों को हाल के महीनों में सफलताएँ मिली हैं, लेकिन आम अफ़ग़ानों को ऐसा महसूस नहीं हो रहा है.

आज का चुनाव भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी हामिद करज़ई की सरकार के लिए भी एक बड़ी परीक्षा है.

अधिकांश अफ़ग़ानों की यही आकांक्षा है कि उनका देश बुरे दौर से निकल कर अंतत: शांति की राह पर वापस आए, लेकिन तालेबान शासन के ख़ात्म के बाद बीते नौ वर्षों पर नज़र डालने के बाद वे भविष्य को लेकर ज़्यादा आशान्वित नहीं हो पाते हैं.

कमेंट लिखें
Click here to type in Hindi
Subscribe Newsletter
Qualifier 1 , Feroz Shah Kotla, Delhi
Chennai Super Kings decided to bat
My Place My Voice
purushottam morwal on
Krishna Reddy on
purushottam morwal on
Nand Kishore Tiwari onNo two