&13;बढ़ते औद्दोगिक उत्पाद और सरकारी मदद की बदौलत भारतीय अर्थव्यवस्था ने पिछले एक साल की सबसे बेहतर वृद्धि दर दर्ज की है. जुलाई से सितंबर यानि वित्तीय वर्ष की दूसरी तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था 7.9 प्रतिशत की दर से बढ़ी.
&13;ये दर अबतक घोषित 6.3 प्रतिशत सालाना वृद्धि के अनुमान से कहीं ज़्यादा है. ग़ौरतलब है कि ये वृद्धि दर पिछले चार दशकों के सबसे ख़राब मॉनसून और कमज़ोर कृषि क्षेत्र के बावजूद है.
&13;योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने दिल्ली में पत्रकारों से बात करते हुए कहा: "आनेवाले दिनों में भी हम उम्मीद से बेहतर सुधार देख सकते हैं." उनका कहना था कि सरकार अब पहले की 6.5 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर के लक्ष्य को और उपर करेगी लेकिन उन्होंने ये नहीं बताया कि वो लक्ष्य क्या होगा.
&13;माना जा रहा है कि इस तिमाही में इतने बेहतर प्रदर्शन की वजह है उत्पाद क्षेत्र में 9.2 प्रतिशत की वृद्धि और सामाजिक क्षेत्र में सरकार की तरफ़ से किए जानेवाले खर्च में 12.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी. इस खर्च की वजह से भारतीय अर्थव्यवस्था अंतरराष्ट्रीय मंदी के प्रकोप से बची रही.
&13;भारत पर वैसे भी अंतरराष्ट्रीय मंदी की मार कम रही क्योंकि घरेलू मांग में कमी नहीं आई. साल की पहली तिमाई में वृद्धि दर 6.1 थी. दरअसल पूरे एशियाई क्षेत्र में आर्थिक मंदी से उबरने के लक्षण नज़र आए और चीन की अर्थव्यवस्था 8.9 प्रतिशत की दर से बढ़ी.
&13;कुछ विश्लेषकों का कहना है कि इस बेहतर प्रदर्शन के बाद संभव है कि रिज़र्व बैंक ब्याज दर बढ़ाने की सोचे. लेकिन अर्थशास्त्रियों का कहना है कि संभावना अभी भी यही है कि केंद्रीय बैंक जनवरी तक ब्याज दर को वर्तमान स्तर पर ही रखेगा जिससे इस वृद्धि दर को और मज़बूत किया जा सके. पिछले दिनों में कई आर्थिक संगठनों का विश्लेषण रहा है कि दुनिया को आर्थिक मंदी से उबारने में भारत और चीन जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं की अहम भूमिका रहेगी.
