एक प्रमुख परोपकारी संस्था का कहना है कि दुनिया के अनाथालयों में रहने वाले पाँच में से कम से कम चार बच्चों के जीवित माँ-बाप होते हैं.
'सेव द चिल्ड्रेन' नामक संस्था ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि कुछ अनाथालय बच्चे उन्हें सौंपने के लिए ग़रीब माँ-बाप पर दबाव डालते हैं.
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस वजह से लाखों बच्चों की ज़िंदगी इन संस्थाओं में ख़तरे में डाली जाती है और इन पर बलात्कार, मार-पीट और तस्करी का ख़तरा मंडराता रहता है.
रिपोर्ट की लेखिका कोरिन्ना कसाकी के मुताबिक, "यह एक भ्रांति है कि अनाथालयों में रहने वाले बच्चों के माता-पिता नहीं होते. चूंकि उनके माँ-बाप उनके भोजन, कपड़े और शिक्षा का इंतजाम नहीं कर सकते इसलिए वे इन जगहों पर रहते हैं."
इस संस्था का कहना है कि संसाधनों का इस्तेमाल परिवार को सहायता पहुँचाने वाले काम में करना चाहिए ताकि वे अपने बच्चों की देख-भाल ठीक से कर सकें.
फ़ायदे का धंधा
संस्था ने अपनी रिपोर्ट में अनाथालयों पर कड़ी देख-रेख की मांग की है.
उनका कहना है कि क़रीब 80 लाख बच्चे अनाथालय या ऐसी ही संस्थाओं में दुनिया भर में रहते हैं, जबकि वास्तविक संख्या कहीं ज्यादा होगी क्योंकि कई संस्थाएं पंजीकृत नहीं हैं.
रिपोर्ट का कहना है कि इस बढ़ते कारोबार में बच्चे 'वस्तु' बन गए हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक, "अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बच्चों की तस्करी और गोद लेने वाली संस्थाओं से फ़ायदा कमाने के लिए कई संस्थाएँ बच्चों को अपने यहाँ भर्ती करती हैं."
"चूँकि कई संस्थाओं को इस आधार पर फ़ंड मिलता है कि उनके यहाँ कितने बच्चे रहते हैं और इस वजह से उनका ज़ोर बच्चों की संख्या बढ़ाने पर रहता है."
रिपोर्ट के मुताबिक चूँकि अनाथालयों को सरकारी और ग़ैर सरकारी संस्थाओँ से काफ़ी आर्थिक सहायता मिलती है इस वजह से कुछ देशों में अनाथालय चलाना एक बड़ा धंधा बन गया है.
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