मंगलवार को राज्यसभा में समाजवादी पार्टी के महासचिव अमर सिंह और भारतीय जनता पार्टी के नेता एसएस अहलूवालिया के बीच हाथापाई हुई.
इस घटना के लिए बाद में अमर सिंह ने संसद में माफ़ी मांगी. भाजपा के नेता एसएस अहलूवालिया ने कहा कि जो हुआ वह नहीं होना चाहिए था.
भारत के गृहमंत्री पी चिदंबरम जब लिब्रहान आयोग की रिपोर्ट पेश कर रहे थे तब भाजपा के नेता एसएस अहलूवालिया और अन्य नेता 'जय श्री राम' के नारे लगा रहे थे.
अमर सिंह नारेबाज़ी का विरोध करते हुए संसद के अध्यक्ष की कुर्सी के नजदीक पहुँच गए और फिर अहलूवालिया के साथ हाथापाई शुरू हो गई. जिसके बाद सपा के अन्य नेताओं ने आकर बीच बचाव किया.
इस घटना के बाद राज्यसभा की कार्रवाई स्थगित कर दी गई.
संसद के बाहर संवाददाताओं से बातचीत करते हुए अमर सिंह ने कहा, " मैं भावावेश में आ गया था."
उन्होंने कहा, " मैं राम भक्त हूँ, राम का पुजारी हूँ..राम हमारी आस्था हैं, राम को लेकर राजनीति नहीं होनी चाहिए."
अमर सिंह ने कहा कि जब लिब्रहान आयोग की रिपोर्ट पेश की जा रही थी तब भाजपा नेताओं का नारा लगाना ठीक नहीं था.
अमर सिंह ने कहा कि भाषाई और सूबाई सांप्रदायिकता हम महाराष्ट्र विधानसभा मे देख चुके हैं और इसे रोका जाना चाहिए.
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