चीनी सुरक्षा बलों ने पश्चिमी प्रांत शिनकियांग में 'अपराधियों को ख़त्म' करने के लिए 'कड़ी कार्रवाई' करने का निश्चय किया है ताकि वहाँ सरकारी 'सुरक्षा बल के चेहरे' को बदला जा सके. ग़ौरतलब है कि इस वर्ष शिनकियांग की राजधानी उरुमक़ी में दो बार जातीय हिंसा की घटना हो चुकी है जिसमें 197 लोग मारे गए थे. शिनकियांग चीन का सबसे अशांत इलाक़ा है जहाँ चीनी सेना की काफ़ी मौजूदगी है.
&13;चीनी प्रशासन ने इस इलाक़े में रहने वाले हान लोगों की इस शिकायत पर कि हिंसा में शामिल ज़्यादा दोषियों को सज़ा नहीं दी गई, वहाँ पर और सैन्य दबदबा बढ़ाने का निश्चय किया है. हिंसा में शामिल होने के आरोप मे उरुमकी के 21 लोगों को अब तक सज़ा दी जा चुकी है.
&13;लोगों के अधिकारों की अवहेलना को लेकर सेना की कड़ी कार्रवाई के निर्णय की आलोचना पहले ही काफ़ी की जा चुकी है. उरुमकी में ज़्यादातर मुस्लिम समुदाय के लोग रहते हैं. उनका कहना है कि इस इलाक़े में हान समुदाय के लोगों ने आकर अपना डेरा डाल दिया है और अच्छी नौकरियों पर क़ब्ज़ा कर लिया है.
&13;वे इस वर्ष जुलाई में हुई हिंसा के लिए बढ़ती हुई बेरोज़गारी को ज़िम्मेदार मानते हैं. हालांकि चीन का कहना है कि हिंसा में बाहरी तत्वों का हाथ था और वह इस इलाके में अपनी नीतियों को नहीं बदलने को लेकर अड़ा हुआ है.
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