
नई दिल्ली। जसवंत सिंह की किताब प्रकाशित होते ही भारतीय जनता पार्टी में मानों भूचाल सा आ गया है। किताब के आने के पहले वसुंधरा राजे और उसके बाद अरुण शौरी ने भाजपा के शीर्ष नेताओं के खिलाफ आग उगली। अंदरूनी आग का सिलसिला जारी है, क्योंकि अब उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बीसी खंडूरी भी बगावत के रास्ते पर चल पड़े हैं।
भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के बीच चल रहे घमासान ने बुधवार को तब नया मोड़ ले लिया जब बीसी खंडूरी ने यह सवाल उठाया कि आखिर उन्हें मुख्यमंत्री पद से क्यों हटाया गया। पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह को लिखी गई एक चिठ्ठी में उन्होंने पूछा कि आखिर उन्हें ये सजा क्यों दी गई, जबकि उनके पास 27 विधायकों का समर्थन है। लोकसभा चुनाव में उत्तराखंड की सभी पांच सीटें भाजपा हार गई, लिहाजा इसकी गाज खंडूरी पर गिरा दी गई।
उस समय चुप रहे खंडूरी ने अब मुंह खोल दिया है। अगर शीर्ष नेताओं को बात को गंभीरता से लेते हुए संभालने की कोशिश नहीं की तो खंडूरी भी भाजपा के खिलाफ आग उगल सकते हैं। खास बात यह है कि अबतक हर नेता ने भाजपा के अंदरूनी घावों को ही कुरेदा है।
भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के बीच चल रहे घमासान ने बुधवार को तब नया मोड़ ले लिया जब बीसी खंडूरी ने यह सवाल उठाया कि आखिर उन्हें मुख्यमंत्री पद से क्यों हटाया गया। पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह को लिखी गई एक चिठ्ठी में उन्होंने पूछा कि आखिर उन्हें ये सजा क्यों दी गई, जबकि उनके पास 27 विधायकों का समर्थन है। लोकसभा चुनाव में उत्तराखंड की सभी पांच सीटें भाजपा हार गई, लिहाजा इसकी गाज खंडूरी पर गिरा दी गई।
उस समय चुप रहे खंडूरी ने अब मुंह खोल दिया है। अगर शीर्ष नेताओं को बात को गंभीरता से लेते हुए संभालने की कोशिश नहीं की तो खंडूरी भी भाजपा के खिलाफ आग उगल सकते हैं। खास बात यह है कि अबतक हर नेता ने भाजपा के अंदरूनी घावों को ही कुरेदा है।












