
अहमदाबाद। गुजरात सरकार ने राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल के सुझावों को दरकिनार करते हुए मंगलवार को गुजरात कंट्रोल ऑर ऑर्गनाइज्ड क्राइम एक्ट (गुजकोका) को सदन में पास कर दिया।
राज्य सरकार ने देखा कि आतंकवाद से निपटने के लिए कोई कानून नहीं है और न ही आतंकवाद से संबंधित गतिविधियों से निपटने के लिए, इसलिए उसने सुनियोजित अपराध के साथ आतंकवाद शब्द जोड़कर गुजकोका पास कर दिया।
खास बात यह है कि पिछले दिनों राष्ट्रपति ने इस बिल में तीन संशोधन करने के सुझाव दिए थे, जिनमें से एक भी सुझाव पर राज्य सरकार ने अमल नहीं किया। सदन में पास हो चुका यह बिल अब राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा।
गौरतलब है कि राज्य में आतंकवादी गतिविधियों से निपटने के लिए 2003 में जब गुजकोका लाया गया, तब पहले से ही प्रिवेंशन ऑफ टेररिज्म एक्ट (पोटा) लागू था, लिहाजा राज्य सरकार ने गुजकोका को आतंकवाद से अलग रखा। गुजकोका महाराष्ट्र में लागू हो चुका मकोका की तर्ज पर लाया गया, लेकिन राष्ट्रपति की मंजूरी नहीं मिल सकी। अब देखना यह है कि राष्ट्रपति इस बार गुजकोका पर अपनी मुहर लगाती हैं या नहीं।
राज्य सरकार ने देखा कि आतंकवाद से निपटने के लिए कोई कानून नहीं है और न ही आतंकवाद से संबंधित गतिविधियों से निपटने के लिए, इसलिए उसने सुनियोजित अपराध के साथ आतंकवाद शब्द जोड़कर गुजकोका पास कर दिया।
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राष्ट्रपति ने दिए थे तीन सुझाव खास बात यह है कि पिछले दिनों राष्ट्रपति ने इस बिल में तीन संशोधन करने के सुझाव दिए थे, जिनमें से एक भी सुझाव पर राज्य सरकार ने अमल नहीं किया। सदन में पास हो चुका यह बिल अब राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा।
गौरतलब है कि राज्य में आतंकवादी गतिविधियों से निपटने के लिए 2003 में जब गुजकोका लाया गया, तब पहले से ही प्रिवेंशन ऑफ टेररिज्म एक्ट (पोटा) लागू था, लिहाजा राज्य सरकार ने गुजकोका को आतंकवाद से अलग रखा। गुजकोका महाराष्ट्र में लागू हो चुका मकोका की तर्ज पर लाया गया, लेकिन राष्ट्रपति की मंजूरी नहीं मिल सकी। अब देखना यह है कि राष्ट्रपति इस बार गुजकोका पर अपनी मुहर लगाती हैं या नहीं।












