आपराधिक गतिविधियों से पैदा होने वाले धन पर नज़र रखने के लिए बनाए गए अंतरराष्ट्रीय संगठन फ़ाइनेंशियल एक्शन टास्क फ़ोर्स का कहना है कि दुनिया भर में कई फ़ुटबॉल क्लबों का इस्तेमाल बड़े आपराधिक गिरोह कर रहे हैं.
सर्वेक्षण रिपोर्ट का आशय यह नहीं है कि फ़ुटबॉल की दुनिया में अपराध की पैठ बढ़ गई है लेकिन यह बताने की कोशिश की गई है कि व्यवस्था ऐसी है कि काले धन को सफ़ेद बनाने वाले उसका फ़ायदा उठाते हैं.
काला धन
संगठित अंतरराष्ट्रीय आपराधिक गिरोह हमेशा ही ग़लत तरीक़े से कमाए गए धन को क़ानूनी रूप से जायज़ बनाने की कोशिश में लगे रहते हैं.
फ़ाइनेंशियल एक्शन टास्क फ़ोर्स का गठन बीस साल पहले किया गया था जिसका मुख्य उद्देश्य काले धन की आवाजाही को रोकना है.
फ़ुटबॉल के खेल में बहुत पैसा है और रोक-टोक बहुत मामूली है इसलिए अंतरराष्ट्रीय आपराधिक गिरोहों के लिए इस स्थिति का फ़ायदा उठाना आसान है सर्वेक्षण रिपोर्ट
&13; &13;टास्क फ़ोर्स का कहना है कि फ़ुटबॉल के खेल में बहुत पैसा है और रोक-टोक बहुत मामूली है इसलिए अंतरराष्ट्रीय आपराधिक गिरोहों के लिए इस स्थिति का फ़ायदा उठाना आसान है.
रिपोर्ट का कहना है कि क्लबों और खिलाड़ियों की मिल्कियत, अदला-बदली, प्रसारण और फ़ोटो के कॉपीराइट और स्पॉन्सरशिप कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जिनका ग़लत इस्तेमाल करना बहुत कठिन नहीं है.
सर्वेक्षण रिपोर्ट में 20 देशों के उदाहरण दिए गए हैं जहाँ आपराधिक गिरोहों ने काले धन को सफ़ेद करने का इंतज़ाम किया.
फ़ुटबॉल के जाने-माने विशेषज्ञ जॉन बीच का कहना है कि इससे पहले की यह बीमारी और बढ़े, समस्या का हल निकालना ज़रूरी है.
पारदर्शिता की ज़रूरत
इस रिपोर्ट में यूरोप और दक्षिणी अमरीका की मिसालें दी गई हैं लेकिन किसी क्लब या व्यक्ति का नाम नहीं दिया गया है.
रिपोर्ट में काले धन को सफ़ेद करने ही नहीं बल्कि अन्य अपराधों के लिए भी फ़ुटबॉल के इस्तेमाल की बात कही गई है जिनमें मानव तस्करी और करों की चोरी शामिल है.
इसमें यह सुझाव दिया गया है कि दुनिया के सबसे लोकप्रिय खेल के प्रबंधन और आर्थिक मामलों में पारदर्शिता लाने की ज़रूरत है.
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