
लखनऊ। विकास और कानून व्यवस्था की बात करें तो उत्तर प्रदेश बाकी राज्यों के मुकाबले काफी पीछे है। आखिर क्यों न हो जब यहां की मुख्यमंत्री जनता के धन को प्रदेश के विकास की जगह अपनी ही मूर्तियों पर खर्च करेंगी।
सूचना का अधिकार से प्राप्त जानकारियों की मानें तो लखनऊ विकास प्राधिकरण ने खुद माना है कि मायावती और बसपा के संस्थापक स्वर्गीय कांशीराम की मूर्तियों पर करोड़ों रुपए खर्च किया जा रहा है। यूपी के वकील रवि कांत और सुकुमार ने उत्तर प्रदेश सरकार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में मुकदमा ठोका है, कि सरकार जनता के धन का दुरुपयोग कर रही है। दोनों ने मायावती द्वारा लगवायी जा रही मूर्तियों में बड़े घोटाले का आरोप लगाते हुए सीबीआई जांच की मांग की है।
3.49 करोड़ की सिर्फ माया की मूर्तियां
उत्तर प्रदेश सरकार के मुताबिक लखनऊ में विभिन्न स्थानों पर लगाये जाने के लिए मायावती की आठ मूर्तियों पर 3.49 रुपए खर्च हुए। जबकि कांशीराम की मूर्तियों पर 3.37 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। इसके अलावा 52.20 करोड़ रुपए बसपा के चिन्ह हाथी की 60 मूर्मियों व मूर्तियों के आस-पास ग्रेनाइट मार्बल लगाने पर खर्च हो रहा है। इन आंकड़ों का खुलासा रविकांत द्वारा सूचना का अधिकार के तहत मांगी गई जानकारियों में हुआ।
सरकार के अनुसार मायावती और कांशीराम की सबसे बड़ी मूर्तियां लखनऊ के गोमतीनगर स्थित भीमराव अंबेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल में स्थापित की जाएंगी। 24 फुट ऊंचाई वाली दोनों मूर्तियां कांस्य निर्मित होंगी, जिनकी कीमत 3 करोड़ 10 लाख रुपए है।
मायावती के खिलाफ मुकदमा करने वाले वकीलों का कहना है कि सरकार राज्य की गरीबी दूर करने के बजाये इस तरह जनता का धन बहा रही है। उन्होंने 2001 के सेंसस का हवाला देते हुए का कि प्रदेश में सबसे ज्यादा बाल मजदूर और गरीब लोग हैं। मुख्यमंत्री उनकी गरीबी दूर करने के बजाये करोड़ों रुपए मूर्तियां लगवाने में फूंक रही हैं। आखिर क्यों?
उत्तर प्रदेश के वित्त विभाग की अधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक माया के राज में 193 करोड़ रुपए मूर्तियां स्थापित करने पर खर्च हुए। यही नहीं वित्तीय वर्ष 2009-20 में 30 लाख रुपए और खर्च होने हैं।
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सूचना का अधिकार से प्राप्त जानकारियों की मानें तो लखनऊ विकास प्राधिकरण ने खुद माना है कि मायावती और बसपा के संस्थापक स्वर्गीय कांशीराम की मूर्तियों पर करोड़ों रुपए खर्च किया जा रहा है। यूपी के वकील रवि कांत और सुकुमार ने उत्तर प्रदेश सरकार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में मुकदमा ठोका है, कि सरकार जनता के धन का दुरुपयोग कर रही है। दोनों ने मायावती द्वारा लगवायी जा रही मूर्तियों में बड़े घोटाले का आरोप लगाते हुए सीबीआई जांच की मांग की है।
3.49 करोड़ की सिर्फ माया की मूर्तियां
उत्तर प्रदेश सरकार के मुताबिक लखनऊ में विभिन्न स्थानों पर लगाये जाने के लिए मायावती की आठ मूर्तियों पर 3.49 रुपए खर्च हुए। जबकि कांशीराम की मूर्तियों पर 3.37 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। इसके अलावा 52.20 करोड़ रुपए बसपा के चिन्ह हाथी की 60 मूर्मियों व मूर्तियों के आस-पास ग्रेनाइट मार्बल लगाने पर खर्च हो रहा है। इन आंकड़ों का खुलासा रविकांत द्वारा सूचना का अधिकार के तहत मांगी गई जानकारियों में हुआ।
सरकार के अनुसार मायावती और कांशीराम की सबसे बड़ी मूर्तियां लखनऊ के गोमतीनगर स्थित भीमराव अंबेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल में स्थापित की जाएंगी। 24 फुट ऊंचाई वाली दोनों मूर्तियां कांस्य निर्मित होंगी, जिनकी कीमत 3 करोड़ 10 लाख रुपए है।
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मूर्तियां लगाने में खर्च हुए 193 करोड़ रुपए मायावती के खिलाफ मुकदमा करने वाले वकीलों का कहना है कि सरकार राज्य की गरीबी दूर करने के बजाये इस तरह जनता का धन बहा रही है। उन्होंने 2001 के सेंसस का हवाला देते हुए का कि प्रदेश में सबसे ज्यादा बाल मजदूर और गरीब लोग हैं। मुख्यमंत्री उनकी गरीबी दूर करने के बजाये करोड़ों रुपए मूर्तियां लगवाने में फूंक रही हैं। आखिर क्यों?
उत्तर प्रदेश के वित्त विभाग की अधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक माया के राज में 193 करोड़ रुपए मूर्तियां स्थापित करने पर खर्च हुए। यही नहीं वित्तीय वर्ष 2009-20 में 30 लाख रुपए और खर्च होने हैं।
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