समाचार एजेंसी डीपीए के अनुसार कंपनी ऐसा संचार तंत्र विकसित कर रही है जिसकी मदद से सड़क पर ऐसे व्यक्तियों की मौजूदगी का पता लगाया जा सकेगा जो आमतौर पर दिखाई नहीं दे पाते।
उदाहरण के लिए अगर कोई बच्चा सड़क पर ट्रैफिक के बीच कूद जाता है तो ट्रांसपांडर के जरिए वाहन चालक को संबंधित संकेत मिल जाता है। अगर वाहन चालक निश्चित समय में उस संकेत पर प्रतिक्रिया नहीं देता तो यह प्रणाली अपने आप ही ब्रेक का इस्तेमाल करती है।
यह प्रणाली कार में तो होनी ही चाहिए साथ ही अन्य वाहनों तथा सड़क पर चलने वाले लोगों के पास भी ट्रांसपांडर होना चाहिए ताकि दोनों के बीच आपसी संचार पूरा हो सके।
उल्लेखनीय है कि जर्मन सरकार के दुर्घटना संबंधी आंकड़ों के मुताबिक वहां होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में से 48 फीसदी में छह से 14 वर्ष के बच्चे शिकार होते हैं जो अचानक सड़क पर आ जाते हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

















