रॉबिन बंसल
रॉबिन बंसल
नई दिल्ली, 30 अगस्त (आईएएनएस)। राजधानी के सिनेमाघर अपना रूप बदल रहे हैं। एक परदे वाले पुराने सिनेमाघर या तो मल्टीप्लेक्स की शक्ल ले रहे हैं या फिर बंद होने की कगार पर हैं।
मल्टीप्लेक्स (कई पर्दो वाला सिनेमाघर) का दौर आने के बाद एक परदे वाले सिनेमाघरों की ओर दर्शक कम ही रुख करते हैं। राजधानी में वर्ष 1997 में पहला मल्टीप्लेक्स साकेत में 'पीवीआर अनुपम' के नाम से खोला गया था। इसके बाद पुराने सिनेमाघरों को मल्टीप्लेक्स का आकार देने की परंपरा ही चल पड़ी।
दिल्ली में अब तक 25 पुराने सिनेमाघर बंद हो चुके हैं, जबकि 30 सिनेमाघर अभी चालू हालत में हैं। इनमें से कुछ सिनेमाघरों के प्रबंधकों का दावा है कि वे अब भी अच्छी कमाई कर रहे हैं।
दिल्ली के फिल्म वितरक जोगिंदर महाजन ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, " राजधानी के 'सुदर्शन', 'कमल', 'सावित्री', 'ईरोज, 'मेजिस्टिक', 'मिनर्वा', 'रॉबिन' जैसे कई पुराने सिनेमाघर बंद हो चुके हैं।" राजधानी के सभ्रांत इलाके में स्थित मशहूर 'चाणक्य' सिनमाघर को मल्टीप्लेक्स का आकार देने की तैयारी चल रही है।
कनॉट प्लेस में स्थित 'रिवोली' और 'प्लाजा' सिनेमाघरों को पीवीआर ने खरीद लिया है और अब इन्हें लोगों के सामने 'धरोहरों' (हेरिटेज) के रूप में पेश किया जा रहा है।
दक्षिणी दिल्ली में स्थित 'पारस' सिनेमाघर भी नवीकरण के लिए बंद कर दिया गया है। महाजन ने कहा, "नेहरू प्लेस में स्थित पारस सिनेमाघर के मालिक उसका नवीकरण करा रहे हैं, क्योंकि 'सत्यम मल्टीप्लेक्स' खुल जाने से उसे कड़ी प्रतिस्पर्धा करनी पड़ रही है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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