निर्देशक: पंकज आडवानी
कलाकार: केके मेनन, रिमी सेन, अनुपम खेर, चंकी पांडे, यशपाल शर्मा, दिलीप प्रभावलकर
गुरू (केके मेनन) एक कार चोर है उसका पार्टनर गणपत (दिलीप प्रभावलकर) गैराज मालिक है। अंडरवर्ल्ड डॉन फौजदार ( अनुपम खेर) अपने ड्राईवर को एक करोड़ रूपए फिल्मकार गोगी (मनोज पाहवा) के पास भेजने के लिए देता है।
गुरू इस कार को चुराकर गणपत के पास भेज देता है ताकि गणपत कार का हुलिया बदले और दोनों उसे बेच दे। गणपत कार में मिले एक करोड़ रूपए कहीं छुपा देता है।
फौजदार को अपनी कार के बारे में पता चलता है वह अपने गुंडे लवली (जहांगीर खान) को पैसे वापस लेने के लिए भेजता है। इस
बीच गणपत एक दुर्घटना में अपनी याददाश्त खो देता है। फौजदार गुरू को तीन दिन में पैसा वापस करने के लिए बोलता है और पैसा न देने पर जान से मार देने की धमकी देता है।
&13;पंकज आडवानी ने काफी करीने से कहानी परोसी है जो अंत तक बांधे रखती है। ऐसा नही लगता है कि यह पंकज की पहली फिल्म है। फिल्म का पहला भाग ठीक है, बीच में फिल्म कमजोर पड़ती है और अंत में जाकर अपनी पकड़ बना लेती है।
रंजीत बरोत का संगीत प्रभावी है। केके ने हमेशा की तरह अच्छा काम किया है। रिमी सेन ने अपनी अब तक की सबसे अच्छी भूमिका निभाई है। अनुपम खेर को क्लासिक कहा जा सकता है। चंकी पांडे ने डबल रोल किया है। राहुल देव छोटी सी भूमिका में अपनी पहचान बना गए है।
कुल मिलाकर कहा जाए तो एक अच्छी कामेडी देखने जा सकते है।
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कलाकार: केके मेनन, रिमी सेन, अनुपम खेर, चंकी पांडे, यशपाल शर्मा, दिलीप प्रभावलकर
गुरू (केके मेनन) एक कार चोर है उसका पार्टनर गणपत (दिलीप प्रभावलकर) गैराज मालिक है। अंडरवर्ल्ड डॉन फौजदार ( अनुपम खेर) अपने ड्राईवर को एक करोड़ रूपए फिल्मकार गोगी (मनोज पाहवा) के पास भेजने के लिए देता है।
गुरू इस कार को चुराकर गणपत के पास भेज देता है ताकि गणपत कार का हुलिया बदले और दोनों उसे बेच दे। गणपत कार में मिले एक करोड़ रूपए कहीं छुपा देता है।
फौजदार को अपनी कार के बारे में पता चलता है वह अपने गुंडे लवली (जहांगीर खान) को पैसे वापस लेने के लिए भेजता है। इस
बीच गणपत एक दुर्घटना में अपनी याददाश्त खो देता है। फौजदार गुरू को तीन दिन में पैसा वापस करने के लिए बोलता है और पैसा न देने पर जान से मार देने की धमकी देता है।
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गुरू अपनी पुरानी पार्टनर मोना (रिमी सेन) की मदद लेकर पैसे इकट्ठा करता है। दोनों मिलकर एक करोड़ रूपए इकट्ठा करते है। पूरी फिल्म गुरू के पैसे इकट्ठे करने की प्रकिया में चलती है। फिल्म की खासियत है हास्य दृश्य और कलाकारों का शानदार अभिनय।&13;पंकज आडवानी ने काफी करीने से कहानी परोसी है जो अंत तक बांधे रखती है। ऐसा नही लगता है कि यह पंकज की पहली फिल्म है। फिल्म का पहला भाग ठीक है, बीच में फिल्म कमजोर पड़ती है और अंत में जाकर अपनी पकड़ बना लेती है।
रंजीत बरोत का संगीत प्रभावी है। केके ने हमेशा की तरह अच्छा काम किया है। रिमी सेन ने अपनी अब तक की सबसे अच्छी भूमिका निभाई है। अनुपम खेर को क्लासिक कहा जा सकता है। चंकी पांडे ने डबल रोल किया है। राहुल देव छोटी सी भूमिका में अपनी पहचान बना गए है।
कुल मिलाकर कहा जाए तो एक अच्छी कामेडी देखने जा सकते है।
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