बजाते रहो देख... बज गयी दर्शकों की!

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तुषार कपूर, विनय पाठक, रणवीर शोरे और रवि किशन जैसे बेहतरीन कॉमेडी फिल्में दे चुके एक्टर्स एक बार फिर से फिल्म बजाते रहो के साथ दर्शकों को हंसाने के लिए बॉक्स ऑफिस पर उतरे थे लेकिन यूं लगता है कि इस बार इनकी किस्मत ने इनका साथ नहीं दिया। या यूं कह सकते हैं कि बेहतरीन एक्टिंग के बावजूद इन कलाकारों की काबीलियत को निर्देशक कैश नहीं करा पाए। फिल्म की कहानी के साथ ही फिल्म की एंडिंग भी लोगों को कुछ खास नहीं लगी फिल्म में निर्देशन के तौर पर कई सारी कमियां रह गयीं और साथ ही सभी किरदारों के साथ सही तरीके से न्याय नहीं किया गया। डॉली आहलूवालिया और विशाखा सिंह ने भी अपनी तरफ से काफी कोशिश की लेकिन लोगों को हंसाने के चक्कर में कई बार ये किरदार खुद में ही उलझ के रह गये।

कुछ लोगों को फिल्म का अंत पसंद नहीं आया तो कुछ को फिल्म की कहानी। लेकिन खास बात ये थी कि फिल्म को देखने के बाद लोगों को उतना मजा नहीं आया जितना की वो सोचकर गये थे। लोगों को बजाते रहो फिल्म को लेकर काफी उत्सुकता थी और साथ ही सभी सोच रहे थे कि एक बार फिर से कोई बेहतरीन कॉमेडी फिल्म देखने को मिलेगी लेकिन फिल्म की कॉमेडी कुछ खासनहीं रही। लोगों को हंसाने के लिए जैसे निर्देशक को बहुत मेहनत करनी पड़ रही थी। एक तरफ जहां विनय पाठक की बेहतरीन सिचुएशनल कॉमेडी को लेकर लोग काफी उत्साहित थे वहीं दूसरी तरफ रवि किशन के फैन्स भी फिल्म से काफी अपेक्षाएं रखे हुए थे।

कुल मिलाकर बजाते रहो फिल्म ने किसी भी एंगल से दर्शकों को एंटरटेन नहीं किया। बेहतरीन एक्टिगं के बावजूद दर्शकों को हंसाने के लिए फिल्म के किरदार और एक्टर्स को काफी मेहनत करनी पड़ रही थी। आइये जानते हैं कि लोगों का फिल्म को देखने के बाद क्या सोचना है। फिल्हाल तो बॉक्स ऑफिस रिपोर्ट का भी यही कहना है कि बजाते रहो फिल्म की बॉक्स ऑफिस पर भी बैंड बज गयी है।

बजाते रहो ने सभी की बैंड बजा दी

बजाते रहो फिल्म को देखने के बाद लोगों के यही विचार थे कि यार फिल्म ने तो हमारी भी बैंड ही बजा दी। फिल्म को कॉमेडी बनाने की पूरी कोशिश की गयी थी और निर्देशक ने भी काफी मेहनत की। लेकिन फिल्म को देखने के बाद यही फील हुआ कि कहीं ना कहीं कोई कमी रह गयी जिसकी वजह से दर्शकों को मजा नहीं आया।

बजाते रहो कॉमेडी नहीं हॉरर

बजाते रहो फिल्म को देखने के बाज विभा जो कि खुद भी मीडिया लाइन में हैं का कहना हैकि बजाते रहो को कॉमेडी बनाते बनाते फिल्म को हॉरर बना दिया गया है। फिल्म में कॉमेडी डालने की पूरी कोशिश की गयी लेकिन फिर भी बजाते रहो फिल्म को देखने के बाद लोगों को फिल्म कॉमेडी नहीं हॉरर ज्यादा लगी।

बजाते रहो का अंत नहीं था अच्छा

बजाते रहो फिल्म को रिव्यू करने आए कुछ जर्निलस्ट का मानना है कि फिल्म में सभी कलाकारों की एक्टिंग काफी बेहतरीन है लेकिन फिल्म का अंत कुछ खास नहीं है। फिल्म के अंत में आकर निर्देशन ने काफी गलतियां कर दीं। बाकी फिल्म में कलाकारों की एक्टिंग में कोई कमी नहीं थी।

तुषार कपूर चुप ही रहें तो बेहतर है

कुछ दर्शकों का कहना है कि तुषार कपूर चुप ही रहें तो शायद ज्यादा बेहतर होता है। क्योंकि जब भी तुषार कपूर अपने डायलॉग बोलते हैं तो किसी को हंसी नहीं आती। वो शायद खामोश रहकर और अपने एक्सप्रेशन से ही लोगों को हंसा सकते हैं। जैसा कि गोलमाल सीरीज में उन्होंने किया था।

हिंदी ना सही पंजाबी ही बोल लेते

दर्शकों को तुषार कपूर की डायलॉग से ही नहीं बल्कि तुषार की भाषा से भी काफी प्रोब्लम है। दर्शकों का कहना है कि तुषार हिंदी में तो डायलॉग नहीं बोल पाते कम से कम पंजाबी में ही बोल लेते। पूरी पंजाबी भाषा को भी खराब कर या उन्होंने।

English summary
Bajatey Raho, directed by Shashant Shah, had the potential to crack the dark-comedy genre. The plot about elaborate con jobs implemented by middle-class citizens has earlier been done with tongue-in-cheek derision in Dibakar Bannerjee's Khosla Ka Ghosla and Neeraj Pandey's Special Chabbis.
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