अंकुर अरोरा मर्डर केस नहीं करना चाहती थी- टिस्का

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(सोनिका मिश्रा) तारे जमीं पर फिल्म में अपने मां के किरदार के जरिये लोगों की नज़रों में अपनी एक पहचान बनाने वाली एक्ट्रेस टिस्का का कहना है कि वो अंकुर अरोरा मर्डर केस नहीं करना चाहती थीं। क्योंकि इसमें भी उन्हें एक मां का किरदार करना था और वो भी जिसका बेटा मर जाता है। लेकिन फिल्म के निर्देशक सुहेल ततारी के मनाने पर आखिर टिस्का ने इस किरदार के लिए हां कही। टिस्का ने बताया कि उनके घर में अभी तक ऐसा कुछ हादसा नहीं हुआ है तो इस किरदार को करने में उन्हें बहुत मुश्किल आई। वनइंडिया की रिपोर्टर सोनिका मिश्रा के साथ टिस्का चोपड़ा की हुई खास मुलाकात के कुछ अँश यहां मौजूद हैं।

अंकुर अरोरा मर्डर केस में एक बार फिर से आप मां के किरदार में नज़र आ रही हैं। तो आखिर आपने इस किरदार के लिए हां क्यों की।

अंकुर अरोरा मर्डर केस में मैंने अंकुर की मां का किरदार निभाया है जिसका बेटा मर जाता है। जहां तक बात है इसे हां करने की तो मैं बताना चाहूंगी कि जब मुझे ये किरदार निभाने को कहा गया तो पहले तो मैने तय किया था कि मैं इसके लिए मना कर दूंगी। क्योंकि पहली बात कि मैं इस तरह का किरदार फिर से निभाना नहीं चाहती थी मैं कुछ नया करना चाहती थी और दूसरी बात ये थी कि टच वुड मेरे घर में किसी की भी अभी तक मौत नहीं हुई है तो इस किरदार को निभाने के लिए मैं बिल्कुल तैयार नहीं थी। लेकिन फिर सोहेल ने मुझे इस किरदार को निभाने के लिए तैयार किया। आमतौर पर मैं अपने हर एक किरदार के लिए काफी तैयारी करती हूं लेकिन इस किरदार को करने के लिए मैंने किसी भी तरह की तैयारी नहीं की।

जिस तरह से फिल्म में आपने गलत के खिलाफ आवाज उठाई क्या रियल लाइफ में भी टिस्का ऐसी ही हैं।

मुझे लोग रियल लाइफ में लड़ाकू विमान कहते हैं। अभी तो थोड़ा कम हो गया लेकिन पहले तो मैं बहुत तेज थी। अगर कोई पुलिस वाला रिश्वत मांगता है या कोई कुछ गलत करता है तो मै सबसे आगे बढ़कर उसका सामना करती हूं। एक बार मुझसे पासपोर्ट ऑफिस में कहा गया कि 30हजार दीजिए आपका पासपोर्ट आपको मिल जाएगा। लेकिन मैंने मना करके पूरे पांच दिन तक लंबी लाइन में खड़े रहकर अपना पासपोर्ट बनवाया। तो कभी भी मैं गलत का साथ नहीं देती।

आपने हाल ही में अंकुर अरोरा मर्डर केस के इवेंट के दौरान कहा कि आप कुछ लाउड किरदार निभाना चाहती हैं। गालियां देना चाहती हैं। तो क्या कहीं आप इस तरह के रोल्स के जरिये ये जताना चाहती हैं कि असल में टिस्का कैसी हैं।

मैं इस तरह बिल्कुल नहीं हैं। अगर आप सिंगर को कहें कि एक ही धुन में गाना गाए तो वो बोर हो जाएगा। एक एक्टर के तौर पर मैं जब भी कुछ अलग तरह के किरदार देखती हूं तो मुझे दिल में चाहत पैदा होती है कि मैं भी ये किरदार करुं। अब रोने धोने वाले किरदार बहुत हो चुके तो मैं चाहती हूं कि कुछ धमाकेदार और लाउड किरदार करुं। और अब मैं आपको कंफर्म बता रही हूं कि मैं अब कुछ समय के लिए रोने धोने वाले किरदार नहीं करुंगी चाहे वो कितनी भी अच्छी फिल्म क्यों ना हो।

जब आप बतौर ऑडियंस अपनी फिल्म देखती हैं तो आपको कैसा लगता है। यानी आज का सिनेमा आपको कितना प्रभावित करता है।

मेरा दिमाग फट जाता है। कि इसमें हम कुछ अलग भी कर सकते थे। इसे इस तरह से कर सकते थे। मुझे तिग्मांशू धूलिया बेहद पसंद है और उनकी पान सिंह तोमर मेरी पसंदीदा फिल्म है। ऐसी फिल्में ही रियल सिनेमा है।

आप एक थियेटर आर्टिस्ट भी हैं और एक कमर्शियल आर्टिस्ट भी।

थियेटर आपको एक तरह की ट्रेनिंग देती है। लगातार कई दिनों की प्रैक्टिस और लगातार काम करते रहने से आपको खुद को एक्सप्लोर करने का मौका मिलता है। लेकिन थियेटर के जिरेय आपकी लोगों तक पहुंच काफी कम होती है। लेकिन जहां तक बात है फिल्मों की तो आपका काम देखने के लिए लाखों लोग आते हैं उसे पंसद करते हैं। तो वो तो हर कोई चाहता है कि उसका काम अधिक से अधिक लोग देखें।

फिल्म में जैसा कि आपने कहा कि आपको काफी रोना पड़ा। बहुत मुश्किल था ये किरदार निभाना। तो कोई ऐसा सीन था फिल्म में जिसे करते वक्त आपको एक पल ऐसा लगा कि नहीं ये मुझसे नहीं होगा।

ऐसा कुछ तो नहीं हुआ लेकिन फिल्म का एक बहुत फिल्म में एक सीन है कि मेरा बेटा मर गया है और मझे कुछ नहीं पता कि उसके साथ क्या हुआ। मैं वहीं सच मानती हूं जो कि मुझे डॉक्टरों ने बताया। फिर एक इंटर्न मुझे एक लैटर भेजता है कि आपके बेटे का मर्डर हुआ है उसकी मौत को डॉक्टरों द्वारा कवर अप किया जा रहा है। उस लैटर में वो मुझे पूरी डिटेल भेजता है। तो वो पूरा सीन मेरी आंखों के सामने से बीतता हुआ दिखाया जाता है। उससे पहले मेरा किरदार एक बार भी नहीं रोया। क्योंकि उसके लिए ये सब एक सपना सा था। तो उस सीन के बाद ही वो फूट-फूटकर रोती है। उस सीन के बाद ही निर्देशक मेरे पास आए और उनकी आंखों से आंसू की नदियां बह रही थीं। मुझे उस वक्त इतनी हंसी आई कि मैं काफी समय तक तो हंसती ही रही।

जिया खान की तरह कई बॉलीवुड एक्ट्रेसेस ने डिप्रेशन के चलते अपनी जिंदगी खत्म करने जैसा बड़ा कदम उठाया है। इसपर आपका एक फीमेल एक्ट्रेस क्या कहना है।

इंडस्ट्री के बाहर अगर आप देखें तो देश में कई सारे सुसाइड केस होते हैं। लेकिन इंडस्ट्री से जुड़े लोगों के ये केस इसलिए सामने आते हैं क्योंकि वो जिया खान हैं या कोई बॉलीवुड की ग्लैमरस एक्ट्रेस हैं। इस तरह का कदम उठाना बहुत ही गलत है। आपको किसी भी चीज को इतना सीरियसली नहीं लेना चाहिए। आपको वो करना चाहिए जो आपको खुशी दे। अपनी जिंदगी को खुशी के साथ जीना चाहिए। अगर आपको एक्टिंग नहीं सिर्फ फेम से प्यार है तो आप वाकई मुसीबत में हैं।

आपको लगता है कि इंडस्ट्री मेल ओरियंटेड है?

अगर आपमें दम है तो दम है। फिर कोई समाज मेल ओरियेंटेड है तो उससे कोई फर्क नहीं पड़ता।

English summary
Tisca Chopra is playinh Ankur Arora's mother role in Ankur Arora Murder Case movie. Tisca Choipra says she never wanted to do this film but Director Suhail Tatari convinced her for this role.
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